भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है। विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा की दो सीटों पर जीत तय थी, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही थी। हालांकि भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। तीसरी सीट किसे मिलेगी, मीनाक्षी नटराजन या महेश केवट ? इस पर सियासी गलियारो में चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, मध्यप्रदेश में तीन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं । इनके लिए भाजपा ने रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उतारा है। यानी, तीन सीट के लिए चार उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। अगर 11 जून तक ये सभी उम्मीदवार मैदान में डटे रहते हैं तो 18 जून को राज्य में मतदान होगा। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। दतिया विधानसभा के विधायक का निर्वाचन शून्य घोषित हो चुका है, वहीं विजयपुर विधायक को कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव के मतदान के लिए अयोग्य बताया है । इस हिसाब से वर्तमान में 228 सदस्य मतदान के पात्र हैं । इस लिहाज से एक उम्मीदवार को जीतने के लिए पहली वरीयता के 58 वोटों की जरूरत पड़ेगी। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63 विधायक हैं । वहीं, एक विधायक भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश डोडियार हैं। अगर दोनों पक्षों से क्रॉस वोटिंग नहीं होती है तो भाजपा अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से जिता सकती है। वहीं, कांग्रेस भी अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को जिता सकती है।
समीकरण जिस पर रहेगी नजर:
भाजपा को अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए 116 प्रथम वरीयता के वोट की जरूरत पड़ेगी। इसके बाद भी भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे। यानी तीसरी सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त 10 वोट की जरूरत होगी। बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के रिश्ते पार्टी से ठीक नहीं हैं। वहीं, डोडियार का वोट अगर भाजपा उम्मीदवार को मिलता है और कांग्रेस के नौ विधायक क्रॉस वोटिंग करते हैं तो मामला पलट जाएगा। उधर, कांग्रेस में अभी 63 विधायक हैं क्योंकि विजयपुर के विधायक मतदान के लिए अयोग्य हैं। ऐसे में कांग्रेस के पास 63 विधायक यानी अतिरिक्त पांच वोट हैं। कांग्रेस के छह विधायकों ने अगर क्रॉस वोटिंग कर दी तो तीसरी सीट पर फैसला दूसरी वरीयता के वोटों से होगा। इस स्थिति में भी भाजपा के फायदे में रह सकती है। वहीं, दूसरी ओर अगर कांग्रेस भी सत्ता पक्ष के विधायकों में सेंध लगाने में कामयाब होती है लड़ाई और रोचक हो सकती है।
सप्रे बीजेपी के साथ:
मध्य प्रदेश में सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीतकर सदन पहुंची विधायक निर्मला सप्रे को लेकर कैलाश विजयवर्गीय ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान दावा किया कि, निर्मला सप्रे राज्सभा चुनाव में बीजेपी के साथ रहेंगी। बीना विधायक निर्मला सप्रे सीएम हाउस पहुंची थीं। यहां उनकी सीएम व पार्टी के बड़े नेताओं से मुलाकात हुई है। जाहिर है राज्यसभा चुनाव के बीच यह मुलाकात अहम मानी जा रही है।
5-5 करोड़ रुपए के ऑफर:
पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने बड़ा दावा किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने कहा कि बीजेपी ऐसे लोगों को गुमराह करती है। यह साफ है कि उनका दो और हमारा एक पर है। ऐसे में हमारा एक उम्मीदवार जीतेगा। उन्होंने कहा कि ये लोग लालच दे रहे हैं कि इतने पैसे ले लो। 5 से 8 करोड़ रुपए की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधायकों के पास ऑफर आ रहे हैं। सभी विधायकों को ये लोग फोन कर रहे हैं।




