नगर वन और वाटिकाएं बन रहीं हरित विकास की पहचान

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में हरित एवं सतत शहरी विकास को नई दिशा मिली है। वन विभाग द्वारा संचालित ‘नगर वन योजना’ जन- भागीदारी आधारित मॉडल के रूप में विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रभावी पहल बन गई है। वन विभाग ‘नगर वन योजना’ को जन- आंदोलन का स्वरूप देते हुए इसे जन- भागीदारी आधारित मॉडल के रूप में विकसित कर रहा है । शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में ‘नगर वन योजना’ एक दूरदर्शी और प्रभावशाली पहल के रूप में उभरकर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, घटते हरित आवरण और बढ़ते पर्यावरणीय दबावों के बीच यह योजना शहरों को प्राकृतिक हरियाली से जोड़ने का एक सशक्त ब्लू-प्रिंट है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा वर्ष 2020 में प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत नगर वनों और नगर वाटिकाओं का विकास कर शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल वातावरण निर्मित किया जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख शहरों और जिला मुख्यालयों के समीप विकसित किए जा रहे नगर वन, नागरिकों को प्राकृतिक वातावरण का अनुभव कराने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित भी कर रहे हैं । योजना का प्रमुख उद्देश्य शहरों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के साथ शहरवासियों को प्रकृति के करीब लाकर पर्यावरण जागरूकता और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है ।

प्रदेश में 94 नगर वन और वाटिकाओं का विकास:
‘नगर वन योजना’ में प्रदेश में अब तक 94 नगर वन एवं नगर वाटिकाओं के विकास को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनका कुल क्षेत्रफल लगभग 3141 हेक्टेयर है। योजना का विस्तार प्रदेश के विभिन्न वन वृत्तों और जिलों में किया गया है, जिससे शहरी क्षेत्रों में हरित अवसंरचना का व्यापक नेटवर्क विकसित हो रहा है। योजना में विकसित किए जा रहे नगर वनों में पौध-रोपण, फेंसिंग, मिट्टी और नमी संरक्षण कार्य, जन-उपयोगी संरचनाएं, मनोरंजन सुविधाएं तथा पर्यावरण शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों को समाहित किया गया है। प्रत्येक नगर वन को स्थानीय भौगोलिक, पारिस्थितिकीय और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।

बहुआयामी सुविधाओं से सुसज्जित नगर वन:
नगर वनों को नागरिकों की सुविधा, सहभागिता और पर्यावरण शिक्षा को ध्यान में रखते हुए बहुआयामी सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है। इनमें एंट्री गेट, वॉकिंग ट्रैक, आर.सी.सी. सड़कें, ब्रिज, स व्यू-पॉइंट्स, वॉच टॉवर, साइन बोर्ड, तालाब, जल संरचनाएं, गेबियन संरचनाएं, पानी की टंकियां, प्रकृति पथ, खुले में बैठने की व्यवस्था, गज़ेबो, टॉइलेट्स और पेयजल सुविधाएं शामिल हैं। कई नगर वनों में बटरफ्लाई गार्डन, नक्षत्र वाटिका, औषधीय पौधों के क्षेत्र, मियावाकी तकनीक से पौधरोपण, प्रकृति व्याख्या केंद्र और जैव विविधता प्रदर्शन क्षेत्र भी विकसित किए गए हैं।

प्रदेश में विकसित हो रहे नगर वन बन रहे आकर्षण का केंद्र:
भोपाल के जैतपुर और लहारपुर नगर वन, उज्जैन का नीलगंगा नगर वन, इंदौर के देवगुराडिय़ा और आई.आई.टी. क्षेत्र के नगर वन, जबलपुर का शंकरगढ़ हिल्स नगर वन, देवास का कैलाशनगर-बागली और दीवतपुर नगर वन, नरसिंहपुर का नर्मदा खेल पार्क नगर वन, मंडला का मंडलेश्वर नगर वन तथा उमरिया, नीमच, श्योपुर, सागर, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा और अन्य जिलों में विकसित हो रहे नगर वन इस योजना की सफलता की मिसाल बन रहे हैं।