मध्यप्रदेश महाराष्ट्र के बीच बढ़ेगा संपर्क

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्यप्रदेश के तेजी से विकसित हो रहे कृषि क्षेत्र और मध्य भारत के केले के प्रमुख केन्द्र खंडवा और बुरहानपुर में प्रतिवर्ष 1.7 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक केले का उत्पादन होता है। यहां से प्रतिदिन 140 भारी-भरकम ट्रक घरेलू बाजारों और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक केले पहुंचाते हैं। वर्षों से इन ट्रकों को संकरी और जर्जर सड़कों से होकर गुजरना पड़ता था । इससे आवागमन धीमा हो जाता था, यात्रा का समय बढ़ जाता था और परिवहन एक कठिन कार्य बन जाता था । लेकिन महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत एनएच- 753 एल के बोरगांव से शाहपुर खंड के आधुनिक चार लेन वाले राजमार्ग गलियारे के रूप में विकसित होने से अब यह स्थिति बदलने वाली है। एनएच – 753 एल का बोरगांव से शाहपुर तक का खंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और यह महाराष्ट्र में बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक फैले एक बड़े गलियारे का से मुक्तईनगर तक फैले एक बड़े गलियारे का हिस्सा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा विकसित इस गलियारे से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच अंतर – राज्यीय संपर्क को नया रूप मिलने की उम्मीद है।

खेत से बाजार तक के संपर्क को मजबूती:
यह परियोजना केले, कपास, सोयाबीन और गेहूं जैसी फसलों के लिए प्रसिद्ध कृषि प्रधान क्षेत्रों से होकर गुजरती है। स्थानीय किसानों और ट्रांसपोर्टरों के लिए, इन बेहतर सड़कों का सीधा लाभ यह होगा कि उनकी बाजार तक तेजी से पहुंच संभव होगी और परिवहन लागत में कमी आएगी। इस क्षेत्र के गांवों के लिए, यह राजमार्ग पहले से ही दैनिक जीवन में एक बड़ा सुधार साबित हो रहा है। बुरहानपुर जिले की झीरी पंचायत की सरपंच आशा कैथवास बताती हैं कि पुरानी सड़क की खराब हालत के कारण परिवहन कितना कठिन हो गया था। उनके अनुसार, क्षतिग्रस्त सतहों और गड्ढों के कारण भारी वाहनों की आवाजाही पहले बेहद चुनौतीपूर्ण थी।