भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के ताजा और सख्त निर्देशों ने मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदलने का संकेत दे दिया है। अदालत ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा है कि पदोन्नति, स्थानांतरण (ट्रांसफर) और अतिशेष (सरप्लस) की प्रक्रिया अब किसी भी हालत में मनमाने ढंग से नहीं चल सकती। इसके लिए एक तय क्रम अपनाना होगा, जिसमें सबसे पहले पदोन्नति को प्राथमिकता दी जाएगी। यह आदेश ऐसे समय आया है जब विभाग में लंबे समय से पदोन्नति और ट्रांसफर को लेकर असमंजस और असंतोष का माहौल बना हुआ था। अब कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पूरे सिस्टम में तेजी से बदलाव की स्थिति बन गई है । अदालत ने अपने स्थिति बन गई है । अदालत ने अपने आदेश में साफ किया है कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा ( पदोन्नति) मध्यप्रदेश सिविल सेवा ( पदोन्नति ) नियम 2025 फिलहाल न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और इन पर अंतरिम रोक लगी हुई है। इसका मतलब यह है कि इन नए नियमों के आधार पर कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकती । ऐसी स्थिति में विभाग को पहले से लागू पुराने नियमों के आधार पर ही पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा, ताकि किसी भी तरह की कानूनी जटिलता से बचा जा सके हाईकोर्ट ने सिर्फ दिशा-निर्देश ही नहीं दिए, बल्कि एक सख्त समयसीमा भी तय की है। अदालत ने कहा है कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर पूरी पदोन्नति प्रक्रिया खत्म की जाए। इसमें उच्च पदों पर कार्यवाहक नियुक्ति और प्रभार देने की प्रक्रिया भी शामिल है। यानी विभाग को तय समय के भीतर तेजी से काम करना होगा, वरना जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उच्च पदों पर कार्यवाहक नियुक्ति और प्रभार देने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए । यह प्रक्रिया नए नियमों से प्रभावित नहीं होगी, क्योंकि उन पर फिलहाल रोक लगी है ।




