भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते वर्षों में नारी सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। बच्चों, किशोरी बालिकाओं और महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण को केंद्र में रखते विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नवाचार भी किये गये हैं। साथ ही महिलाओं के समग्र सामाजिक, आर्थिक विकास के उद्देश्य से देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण भी चलाया जा रहा है। इन सभी प्रयासों के सुखद परिणामों से मध्यप्रदेश नारी सशक्तिकरण का रोल मॉडल बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी चार प्रमुख प्राथमिकता वर्गों में महिलाओं को शामिल करते हुए देश की प्रगति को इन वर्गों की प्रगति से जोड़कर महिला कल्याण को प्राथमिकता देने का आव्हान किया है। इस नाते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला कल्याण कार्यक्रमों पर फोकस करने की रणनीति तैयार की। प्रदेश में 453 एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के अंतर्गत 97,882 आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं, जिनके माध्यम से लगभग 84 लाख हितग्राहियों को सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। आंगनवाड़ियों में जियो फेंसिंग आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है। प्रदेश कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की पारदर्शी ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर देश का पहला राज्य बना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के लिए 3,768 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पोषण 2.0 के अंतर्गत मातृ एवं शिशु पोषण, गंभीर कुपोषित बच्चों के उपचार और निगरानी के लिए पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से सभी आंगनवाड़ियों की मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रदेश में फेस मैचिंग प्रणाली लागू कर 94 प्रतिशत हितग्राहियों का सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है, जिसमें देश में प्रथम स्थान पर है। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के अंतर्गत टेक होम राशन और गर्म पका भोजन योजना से 60 लाख से अधिक बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं को लाभ मिल रहा है। इस बार के बजट में पोषण आहार के लिए 1,150 करोड़ रुपये तथा पोषण अभियान के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के माध्यम से वर्ष 2025 में पंजीकृत 7.37 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों में से 3.71 लाख बच्चों को सामान्य पोषण स्तर पर लाया गया। झाबुआ जिले के मोटी आई नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त हुआ। प्रदेश में 5,263 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण प्रगति पर है। प्रदेश में बड़ी संख्या में 38,900 आंगनवाड़ी भवनों में विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना भी प्रस्तावित है। भवन निर्माण, उन्नयन और आधारभूत सुविधाओं के लिए 459 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।




