भोपाल (मध्य स्वर्णिम): भौंरी स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के परेड ग्राउंड में शुक्रवार को मध्यप्रदेश पुलिस के 43 वे बैच के 17परिवीक्षाधीन उप पुलिस अधीक्षकों के दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मध्यप्रदेश पुलिस के महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने बतौर मुख्य अतिथि सलामी ली। पुलिस महानिदेशक कैलाशमकवाणा ने सभी प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पुलिसिंग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए अधिकारियों को निरंतर साइबर फील्ड में अपनी स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना होगा तथा तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग में दक्ष बनना होगा। मकवाणा ने ‘सिंहस्थ 2028’ के परिप्रेक्ष्य में आने वाली संभावित सुरक्षा, साइबर एवं संगठित अपराध संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से आह्वान किया कि वे भविष्य की परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को तैयार रखें तथा बदलते अपराध परिदृश्य के प्रति सजग एवं सक्षम बनें। उन्होंने कहा कि आज धार्मिक आयोजन से संबंधित या सामुदायिक मुद्दे तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ा कोई भी विषयहो, सोशल मीडिया के माध्यम से तुरंत व्यापक रूप ले लेता है। जनता की अपेक्षा रहती है कि पुलिस द्वारा तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। अतः प्रत्येक अधिकारी को अपने चरित्र, अनुशासन और निर्णय क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सेवा काल में की गई एक छोटी सी लापरवाही भी पूरे जीवन पर दाग बन सकती है, इसलिए नियमों के अनुरूप ही कार्य करें। सोशल मीडिया की सक्रियता के इस दौर में छोटी सी घटना भी वायरल हो सकती है, इसलिए सजगता, संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है। डीजीपी ने कहा कि एक अधिकारी में संवेदनशीलता, सुनने की क्षमता तथा तकनीक के प्रभावी उपयोग की योग्यता होनी चाहिए। प्रत्येक अधिकारी को सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखते हुए स्वयं को समयानुकूल निरंतर विकसित करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा किवर्तमान समय में मादक पदार्थों की समस्या एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आई है, जिसे नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।




