पर्यावरण की अलख जगाने वाले नागर को ‘पद्म श्री’

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): गणतंत्र दिवस-2026 की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की सूची घोषित की है, जिसमें 45 नामों का चयन ‘गुमनाम हीरोज़’ के रूप में किया गया है। इस वर्ष मध्य प्रदेश की तीन प्रतिष्ठित विभूतियों मोहन नागर, भगवानदास रैकवार और कैलाश चंद्र पंत को पद्मश्री से सम्मानित किया जा रहा है। ये पर्यावरण, कला और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए चुने गए हैं। दैनिक मध्य स्वर्णिम के संपादकीय पृष्ठ के लिए लगातार आलेख लिखने वाले और प्रदेश के सक्रिय और जमीनी स्तर पर कार्यरत पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को वर्ष 2026 के पद्म श्री सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा ने प्रदेश को गौरवान्वित किया है। जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और समग्र पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे योगदान ने न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को मजबूती दी है, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है। मोहन नागर ने विशेष रूप से बैतूल जिले की सोना घाटी में वर्षाजल संचयन और जल संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से प्राकृतिक जल चक्र को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। सूखते जल स्रोतों, गिरते भू-जल स्तर और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में उनके प्रयासों ने जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ खेती और आजीविका को भी संबल दिया है। उनके कार्यों का प्रभाव यह रहा कि स्थानीय स्तर पर लोग स्वयं जल संरक्षण की पहल से जुड़ने लगे। नागर द्वारा प्रारंभ किया गया ‘गंगा अवतरण अभियान’ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक जनआंदोलन के रूप में उभरा है। इस अभियान के माध्यम से उन्होंने स्थानीय समुदायों को जोड़ते हुए वैज्ञानिक और पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों को साझा किया। जल संरचनाओं का निर्माण, तालाबों और नालों का पुनर्जीवन, वर्षाजल संग्रहण और जनजागरूकता इस अभियान के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। जल संरक्षण के साथ-साथ मोहन नागर ने जैविक कृषि, गो-संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीव कार्य किए हैं। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति तक सीमित नहीं, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुधन संरक्षण और सामाजिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। इसी सोच के तहत उन्होंने किसानों, युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा।