सोनीपत (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में चल रहे माघ मेले और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद के बीच एक बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि एक योगी, एक संत या सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। योगी ने स्पष्ट किया कि सन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, उसकी असली संपत्ति धर्म है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान है। उन्होंने आयोजक गोरक्षपीठाधीश्वर महंत बालक नाथ महाराज, यहां के महंत और अन्य आयोजकों को बधाई दी। योगी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत में नाथ संप्रदाय सबसे प्राचीन और प्रभावशाली समुदाय है। यह संप्रदाय जनता को जीने का अच्छा तरीका सिखाता है और सनातन धर्म को मजबूत करने में सबसे आगे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सनातन धर्म की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि गुलामी और विदेशी ताकतों को पीछे छोड़ते हुए हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं। भारत का हित होगा तो सनातन धर्म मजबूत होगा, कहा कि ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। राजनीति भी ऐसे लोगों के हाथों में होनी चाहिए जो भारत को मजबूत बनाएं। योगी आदित्यनाथ ने पिछले 11 वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए राम मंदिर निर्माण को याद किया।




