डबल इंजन की सरकार ललक, कसक और सरोकार

0

प्रसंगवश (मध्य स्वर्णिम): सुनील दत्त तिवारी (मो. 9713289999)
“अभी तो शुरुआत है, रफ्तार बाकी है, करने को मुलाकात मीलें दो-चार बाकी है। कौन कहता है कि मंजि़ल आसाँ नहीं, अभी तो इन पैरों में वो झनकार बाकी है”
बलराम सिंह जी की ये पंक्तियां मध्यप्रदेश के बीते दो साल के वैभव की स्थापना की सटीक व्याख्या करने को पर्याप्त है। पिछले दो वर्षों के दौरान प्रदेश ने स्वयं के लिए लक्ष्य भी निर्धारित किए और उनके पूर्ण होने पर जश्न भी मनाया। मकर संक्रांति के दिन जहां एक तरफ सूर्यदेव उत्तरायण हो रहे थे,वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री आवास में डॉ. मोहन यादव खबरनवीसों के साथ केंद्रीय योजनाओं के सफल संचालन पर टीम मध्यप्रदेश की पीठ थपथपा रहे थे। जाहिर है, इन दो वर्षों के दौरान मेरे मध्यप्रदेश के खाते में कई रेखांकित करने वाली उपलब्धियां आई हैं। ऐसा नहीं कि पिछले दौर की सरकारों में जिजीविषा की कमी थी। सभी ने अपने स्तर पर प्रदेश के विकास के नींव को मजबूत करने की कोशिश की थी। लेकिन,कहते हैं न -मंजि़ल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। लिहाजा वर्तमान टीम मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सपनों की उड़ान को हौसले में तब्दील करने का सामथ्र्य दिखाया भी और बताया भी। ये डबल इंजन के सरकार की ललक ही है कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रगति (PRAGATI) प्लेटफॉर्म के माध्यम से विकास योजनाओं की निरंतर समीक्षा की जा रही है। जिससे योजनाओं का लाभ सीधे गांव और गरीब वर्ग तक पहुंच रहा है। इसी तर्ज पर अब प्रदेश में जल्द ही ‘सीएम प्रगति पोर्टल’ की शुरुआत की जाएगी। इसके जरिए सभी विकास परियोजनाओं को तय समय- सीमा में पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।ये टीम मध्यप्रदेश की ललक ही है कि खुद को समय सीमा में बांध कर विकास की इबारत लिखने का साहस जुटाने की आधारशिला लिखी जा रही है।केन्द्रीय मंत्रालयों के माध्यम से प्रदेश में 209 बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात मिली है। इनमें से 2 लाख 61 हजार 340 करोड़ निवेश वाली 108 केंद्रीय विकास परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। प्रदेश में अभी 5 लाख 24 हजार 471 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 101 परियोजनाएं क्रियान्वयन के अधीन हैं। केंद्रीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने 97 प्रतिशत सफलता हासिल की है। इन परियोजनाओं में रेल मंत्रालय की 14, सड़क परिवहन मंत्रालय की 13, विद्युत मंत्रालय की 5 और नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। ‘विरासत से विकास’ के टैग लाइन पर चलते हुए मोहन सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। पांच साला 20 सूत्रीय कार्यक्रम के जगह पर एक वर्ष-एक सूत्र की कार्यप्रणाली बदलाव का बड़ा संकेत हैं। पिछले दो वर्षों के कार्यकाल को महिला और युवा को समर्पित करने के बाद तीसरे वर्ष का लक्ष्य किसान कल्याण को केंद्रित कर शासन में स्पष्टता का सन्देश दिया है। यह शासन करने का वह तरीका है जिससे निचले स्तर के कर्मचारियों को सन्देश की सुस्पष्टता होती है। लाजिमी है,अब जिला स्तर पर भी वही कार्यक्रम बनाए जाएंगे जिनके मूल में किसान कल्याण ही होगा। नि:संदेह इन दो वर्षों के दौरान संस्कृति-संस्कार, रोजगार-व्यापार , संवेदना- सहकार के माध्यम से सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। इस वर्ष का संभावित राज्य के बजट का आकार 4 लाख करोड़ के आस पास होने की पूरी संभावना है। ये केवल बजट के आंकड़ों का आकार नहीं अपितु 9 करोड़ प्रदेश की जनता के सपनों को साकार करने प्रयास है। इन दो वर्षों में सरकार के काम में स्पष्टता भी दिखी। ‘जो कहा -सो किया’ से इतर जो नहीं कहा वो भी किया मोहन सरकार ने।एक बात और जो डॉ. मोहन यादव की सरकार के बारे में बेलाग लिखी जा सकती है कि बतौर मुखिया डॉ. यादव ने पिछले दो सालों में अनगिनत बार प्रेस से मुखातिब होते हुए कठिन सवालों से कभी किनारा नहीं किया। खबरनवीसों से मिलने और बात करने की उनकी ललक हमेशा दिखाई देती है। अब बात कसक की तो छिंदवाड़ा कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत हो या, इंदौर में दूषित जल नागरिकों के लिए जानलेवा बनने का मसला हो,संवेदनशील मुख्यमंत्री ने हमेशा अपनी जिम्मेदारी से बचने की जगह हुई मौतों को गंभीर माना। उनका यह कहना कि ‘हम मौत के आंकड़ों में नहीं जाते एक मौत भी कष्टकारक है एक नेतृत्व की संवेदना का परिचायक है। दरअसल-
“जो पहुंच गए हैं मंजिल पर उनको तो नहीं है नाज-ए-सफर जो चार कदम भी चले नहीं, रफ़्तार की बातें करते हैं”. लिहाजा बतौर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने मनसा-वाचा-कर्मणा नेतृत्व का निर्णायक परिचय अभी तक दिया है। अपेक्षा की जानी चाहिए कि आने वाले सालों में मध्यप्रदेश की गिनती भी देश के समृद्ध राज्यों में होगी,जो 2047 के विकसित भारत में अपना सम्पूर्ण सामथ्र्य प्रदर्शित करेगा।