
विशेष रिपोर्ट (मध्य स्वर्णिम): ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार (मो.9425002527)
मध्यप्रदेश के परिवहन चेक पोस्टों पर अभी भी संगठित अवैध वसूली निरंतर जारी है। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह भले ही चेक पोस्टों पर अवैध वसूली नहीं होने की बात चीख-चीखकर कह रहे है। परन्तु सच्चाई मंत्री जी को छोड़कर सभी को मालूम है कि परिवहन चेक पोस्टों पर संगठित अवैध वसूली का खेल कैसे चल रहा है। बस, थोड़ी अखबारबाजी होने के बाद इसका तरीका बदल दिया गया है। दरअसल ‘उदय’ के परिवहन चेक पोस्टों पर अब ‘विवेक’ से अवैध वसूली करने का फरमान जारी किया गया है। अर्थात वाहनों से रुपए वसूलने के पहले अपने ‘विवेक’ का उपयोग करते हुए पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही वाहन चालकों से रुपए लिए जा रहे है। क्योंकि परिवहन आयुक्त आईपीएस विवेक शर्मा का चेक पोस्टों पर तैनात आरटीआई से साफ कहना है कि वसूली की शिकायत आने पर कार्रवाई करने से वे पीछे नहीं हटेंगे। अब ऐसी स्थिति में प्रदेश के छोटे-बड़े 45 से अधिक परिवहन चेक पोस्टों पर पदस्थ आरटीआई और उनके निजी गुर्गे अपने विवेक से पहले अच्छी तरह पूरी पड़ताल करने के बाद ही वाहन चालकों से आगे ट्रक खड़े करने के बाद चेक पोस्ट से थोड़ी दूरी पर अवैध वसूली की रकम ले रहे हैं। लेकिन उनके इस कृत्य से मध्यप्रदेश की मोहन सरकार की राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी भी हो रही हैं। ऐसा इसलिए कि दूसरे राज्यों से आने वाले वाहन चालकों द्वारा अपने-अपने राज्यों में जाकर मध्यप्रदेश की सीमा पर किस तरह से संगठित अवैध वसूली का खेल जारी है इसका बखान करते देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं कुछ वाहन ालकों ने तो इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि सेंधवा, खवासा, पिटौल सहित अन्य परिवहन चेक पोस्ट पर प्रति वाहन 500 से 1000 रुपए वसूले जा रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने परिवहन चेक पोस्ट पर संगठित अवैध वसूली की आंच भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय खर्च और सरकार तक पहुंचने के बाद तत्काल प्रभाव से परिवहन चेकपोस्ट बंद करने फैसला लिया था। परन्तु कुछ समय बाद यह व्यवस्था पहले की तरह धीरे-धीरे अब पूर्ण अस्तित्व में आ गई है। जिसकी बानगी कई वाहन चालकों की जुबानी सुन सकते हैं। इस पूरे संगठित अवैध वसूली के खेल में यह बात समझ से परे है कि डबल इंजन की सरकार में फंड की कमी नहीं होने का दावा स्वयं मुख्यमंत्री कई मर्तबा कर चुके है और विकास कार्यों के लिए बजट की कोई कमी नहीं है, बावजूद इसके संगठित अवैध वसूली से आने वाली बड़ी राशि किन लोगों तक पहुंच रही है, यह खोज का विषय है। खैर जो भी हो यह बात तो स्पष्ट है कि परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह के कार्यकाल में परिवहन चेक पोस्टों पर पुनः संगठित अवैध वसूली जारी है।
टीसी नहीं चाहते पर क्या करें…
राज्य की सीमाओं पर स्थित परिवहन चेक पोस्टों पर वाहन चालकों से संगठित अवैध वसूली के सख्त खिलाफ ट्रांसपोर्ट कमिश्नर विवेक शर्मा भी है। उनका मानना है कि ऐसी गतिविधियों से सरकार की छवि खऱाब होती है। लेकिन वे भी क्या कर सकते है , जब फरमान ऊपर से हो तो…। बताते है कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर विवेक शर्मा ने इसलिए अब तक जिन-जिन चेक पोस्टों की शिकायत में सत्यता पाई , वहां के आरटीआई पर कार्रवाई करने में पीछे नहीं रहे। बस कुछ बड़े चेक पोस्टों को छोड़कर कर…। इसलिए बशीर बद्र की यह लाइन विवेक शर्मा पर सटीक बैठती है।
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी यूं कोई बेवफ़ा नहीं होता




