नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें एक न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया गया था। आरोप है कि उक्त अधिकारी ने वर्ष 2018 में ट्रेन यात्रा के दौरान एक महिला सहयात्री के सामने पेशाब किया और यात्रियों के साथ नशे की हालत में दुव्र्यवहार किया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस आचरण को घृणित और चौंकाने वाला बताते हुए टिप्पणी की कि ऐसे मामले में अधिकारी को बर्खास्त किया जाना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक पक्ष की ओर से दायर याचिका पर न्यायिक अधिकारी और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के विवादित आदेश का प्रभाव और क्रियान्वयन स्थगित रहेगा। मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी। बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने मई 2025 में उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत सितंबर 2019 में संबंधित न्यायिक अधिकारी की सेवा समाप्त कर दी गई थी, और उसे 15 दिनों के भीतर बहाल करने का निर्देश दिया था। आरोपों के अनुसार, मार्च 2011 में सिविल जज (क्लास-2) के पद पर नियुक्त उक्त अधिकारी जून 2018 में ट्रेन से यात्रा कर रहा था। इस दौरान उसने नशे की हालत में यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार किया, अश्लील हरकतें कीं और एक महिला यात्री की बर्थ के सामने पेशाब किया। उपद्रव के चलते यात्रियों को चेन पुलिंग करनी पड़ी, जिससे ट्रेन में देरी हुई। जांच में दोषी पाया गया था आरोपी: इसके बाद सितंबर 2018 में उसके खिलाफ आरोप पत्र और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के साथ एक और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। विभागीय जांच में जांच अधिकारी ने उसे दोषी पाया। प्रशासनिक समिति ने सेवा से हटाने की सजा की सिफारिश की, जिसे सितंबर 2019 में हाईकोर्ट की पीठ ने मंजूरी दे दी। इसके बाद 28 सितंबर 2019 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
जांच में दोषी पाया गया था आरोपी:
इसके बाद सितंबर 2018 में उसके खिलाफ आरोप पत्र और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के साथ एक और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। विभागीय जांच में जांच अधिकारी ने उसे दोषी पाया। प्रशासनिक समिति ने सेवा से हटाने की सजा की सिफारिश की, जिसे सितंबर 2019 में हाईकोर्ट की पीठ ने मंजूरी दे दी। इसके बाद 28 सितंबर 2019 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।




