जबलपुर (मध्य स्वर्णिम): जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि केरल व उत्तर प्रदेश की तरह मानव- वन्यजीव के संघर्ष को प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में रखा जाए। सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेशानुसार पॉलिसी बनाई जाए और चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई जनवरी माह के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की है। रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय पर्यावरण विभाग की गाइडलाइन के अनुसार जंगली हाथियों को पकड़ने का कदम अंतिम उपाय के रूप में होना चाहिए, लेकिन मप्र में इसे पहले विकल्प के रूप में अपनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ से जंगली हाथियों के झुंड मध्य प्रदेश के जंगलों में प्रवेश करते हैं। जिससे किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं और घरों में तोड़फोड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। कुछ मामलों में जंगली हाथियों द्वारा किए गए हमलों में लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है।
हाथियों को यातनाओं का सामना करना पड़ता है:
जंगली हाथियों को प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट (पीसीसीएफ) वाइल्डलाइफ के आदेश पर ही पकड़ा जा सकता है। जंगली हाथी संरक्षित वन्य प्राणियों की प्रथम सूची में आते हैं, और पकड़े जाने के बाद उन्हें टाइगर रिजर्व में भेजकर प्रशिक्षण दिया जाता है। ट्रेनिंग के दौरान हाथियों को यातनाओं का सामना करना पड़ता है।
वर्ष 2017 से अब तक 10 जंगली हाथियों को पकड़ा गया:
हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया था कि पिछले 30 वर्षों में पकड़े गए हाथियों का पूरा विवरण पेश किया जाए। सरकार की तरफ से पेश की गयी रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2017 से अब तक 10 जंगली हाथियों को पकड़ा गया है,जिसमें से दो हाथियों को विदेश से बुलाई गयी कॉलर आईडी पहनाकर छोड़ दिया गया है। हाथियों को कंट्रोल करने के लिए गठित 6 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी के सेंटर ऑफ एलिफेंट स्टेडी कॉलेज ऑफ वेटरनरी एनिमल साइंस के प्रोफेसर राजीव टी.एस को शामिल किया गया है।




