भोपाल: मध्यप्रदेश ने बीते 12 वर्षों में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 19 गुना वृद्धि की है। वर्तमान में मध्यप्रदेश की कुल ऊर्जा उत्पादन का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हरित ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त हो रहा है। यह अभूतपूर्व उपलब्धि राज्य की ऊर्जा नीति, तकनीकी नवाचारों और निवेशक-हितैषी दृष्टिकोण का परिणाम है। राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण देश के अग्रणी ऊर्जा सरप्लस राज्यों में शामिल है। राज्य की नीति प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘स्वच्छ ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार कर रही है। जीआईएस-भोपाल के दौरान प्रदेश की ‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी ने देश-विदेश के निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। इस नीति के कारण अब तक 5.72 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है, जिससे 1.46 लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित होंगे।
सांची बना प्रदेश का पहला सौर शहर: राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सांची को मध्यप्रदेश का पहला सौर शहर घोषित किया गया है। यह परियोजना ‘नेट ज़ीरो कार्बन सिद्धांत’ पर आधारित होगी, अर्थात जितनी ऊर्जा का उपभोग होगा, उतनी ही हरित ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा। यह पहल प्रदेश के साथ पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगी।नर्मदापुरम जिले में नवकरणीय ऊर्जा उपकरणों और पॉवर उपकरणों के लिए समर्पित निर्माण क्षेत्र (डेडिकेटेड मैन्यूफैक्चरिंग जोन) विकसित किया जा रहा है।




