भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर किसान संघ, भाजपा पदाधिकारी, उज्जैन के जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन उज्जैन के साथ बैठक कर सिंहस्थ के आयोजन को लेकर समग्र रूप से चर्चा की। बैठक में सिंहस्थ का आयोजन दिव्य, भव्य और विश्व स्तरीय करने के लिये हर संभव प्रयास करने पर सहमति बनी, जिसमें साधु- संतों, किसानो के हितों का व्यापक रूप से ध्यान रखा जायेगा। चर्चा के बाद सिंहस्थ लैंड पूलिंग को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय प्रशासन विकास विभाग और जिला प्रशासन को आदेश जारी करने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री का किसान संघ ने स्वागत कर आभार व्यक्त किया:
बैठक में वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, किसान संघ की और से सर्वश्री महेश चौधरी, कमल सिंह आँजना, अतुल माहेश्वरी, लक्ष्मी नारायण पटेल, भरत बैस, रमेश दाँगी, बीजेपी संगठन की और से नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, जिला महामंत्री कमलेश बैरवा, महामंत्री जगदीश पांचाल और आनंद खींची उपस्थित रहे। किसान संघ द्वारा मुख्यमंत्री के निर्णय का स्वागत करते हुये आभार व्यक्त किया गया।
प्रशासन सोता रहा मंत्री ने मारी रेड:
मध्य प्रदेश शासन के राज्य मंत्री नारायण सिंह पंवार अपने क्षेत्रीय दौरे के दौरान अवैध खनन कर रही दो जेसीबी मशीन को पकड़ लिया और तत्काल एसपी कलेक्टर को कार्रवाई के निर्देश दिए। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार राजगढ़ जिले के सेमलापार गांव जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें पार्वती नदी में अवैध रूप से खनन कर रही दो जेसीबी मशीन दिखी। वह तत्काल मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीन को पकड़कर इसकी जानकारी राजगढ़ कलेक्टर व एसपी को देते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए।इस दौरान मंत्री के साथ मौजूद स्टाफ ने जेसीबी की चाबियां भी ली। लेकिन उनके आगे बढ़ते ही खनन माफिया जेसीबी लेकर भाग गए। बता दें कि राज्य मंत्री नारायण सिंह पवांर के द्वारा गत दिनों राजगढ़ जिले में आयोजित हुई बैठक में कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा और एसपी अमित कुमार तोलानी को अवैध खनन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। लेकिन इसके बावजूद जिले में अवैध खनन किया जा रहा था। जिस पर राज्य मंत्री ने खुद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।इस पूरे मामले में राज्यमंत्री पवांर से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि पार्वती नदी के पुल के समीप करीब 1 किलोमीटर के दायरे में खनन माफिया के द्वारा अवैध खनन किया जा रहा था, जिससे पुल के टूटने का भी खतरा लगातार बना हुआ है।




