प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल के कयासों को मिली हवा

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विशेष संवाददाता/मध्य स्वर्णिम भोपाल: मध्यप्रदेश के डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में फेरबदल की संभावनाओं ने जोर पकड़ लिया है। दरअसल,इसके पीछे खुद मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वो डिप्लोमेटिक जवाब है जिसमे प्रश्न के उत्तर में ही सभी कयासों को जन्म दे दिया है।एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री से जब पूछा गया कि क्या रिपोर्ट तैयार होने के बाद फेरबदल होने की संभावना है, तो उन्होंने सावधानी से लेकिन महत्वपूर्ण जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ‘हमारी पार्टी एक अखिल भारतीय पार्टी है। माननीय प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी), गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हमारी पार्टी उनके नेतृत्व में काम करती है। दो साल की समीक्षा स्वाभाविक है। पार्टी जो भी फैसला करेगी, हम उसके पाबंद हैं। अवसर कई जन्मों के पुण्य के बाद आते हैं। काम करना है, और हमें वह करना चाहिए।’ उनके जवाब ने फेरबदल की संभावना की न तो पुष्टि की और न ही इनकार किया, जिससे भोपाल में राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई। रिपोट्र्स की मानें तो सरकार के दो साल पूरे होने के अवसर पर सभी राज्य मंत्रियों की प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। यह रिपोर्ट चार विस्तृत मापदंडों पर आधारित है और इसे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया गया है। इस मूल्यांकन में मंत्रियों के विभागों में नवाचार और नई पहलों के कार्यान्वयन का आंकलन किया गया है। साथ ही, विकसित भारत संकल्प यात्रा सहित राज्य और केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के प्रभावी निष्पादन को भी परखा गया है। मंत्रियों के बीच सरकार और पार्टी संगठन के बीच समन्वय और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं, अधिकारियों और जनता के साथ जुड़ाव का भी मूल्यांकन किया गया है।मंत्रियों पर ही नहीं, बल्कि विधायकों पर भी नजर रखी जा रही है। हाल ही में विधायकों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चार साल का विस्तृत विकास रोडमैप तैयार करने को कहा गया था। विधायक निधि के उपयोग, कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन और स्थानीय मुद्दों के साथ जुड़ाव का भी मूल्यांकन किया गया है। इन रिपोर्टों को भी मुख्यमंत्री को प्रस्तुत किया जाएगा, जो दर्शाता है कि यह समीक्षा केवल कैबिनेट समायोजन से कहीं अधिक व्यापक है।जिला-स्तरीय प्रदर्शन की भी बारीकी से जांच की गई है। मंत्रियों को उनके आवंटित जिलों में बिताए गए समय, विकास बैठकों में उनकी उपस्थिति, गांवों में रात्रि विश्राम और नागरिकों से सीधे जुडऩे के लिए आयोजित चौपालों के आधार पर आंका गया है। वर्तमान में 31-सदस्यीय कैबिनेट में चार मंत्री पद खाली हैं। इस रिपोर्ट के समय ने अटकलों को हवा दी है। संभावित कैबिनेट विस्तार या फेरबदल का उद्देश्य क्षेत्रीय संतुलन को संबोधित करना और 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले सरकार को मजबूत करना है।

मप्र में गुजरात फॉर्मूले पर विचार: भाजपा मध्य प्रदेश में ‘गुजरात मॉडल’ लागू करने पर विचार कर सकती है। इस मॉडल के तहत, कई वरिष्ठ विधायकों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों को पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में स्थानांतरित किया जा सकता है। नए राष्ट्रीय भाजपा अध्यक्ष की आगामी नियुक्ति भी मध्य प्रदेश के किन वरिष्ठ नेताओं को केंद्रीय टीम में जगह मिलेगी, यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। संगठनात्मक तस्वीर स्पष्ट होने के बाद ही मोहन यादव कैबिनेट का अंतिम स्वरूप सामने आएगा।अभी मुख्यमंत्री सहित बारह मंत्री ओबीसी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसका मध्य प्रदेश में महत्वपूर्ण प्रभाव है। नौ मंत्री, जिनमें उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला भी शामिल हैं, सवर्ण जातियों से हैं, जबकि पांच अनुसूचित जनजाति और पांच अनुसूचित जाति के विधायकों के पास मंत्री पद हैं।