10 साल की सजा, 10 करोड़ जुर्माना, पेपर लीक संशोधन बिल को मोदी कैबिनेट की मंजूरी

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नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): नीट पेपर लीक के प्रदर्शन के बीच कैबिनेट बैठक ने पेपर लीक संशोधन बिल को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और सख्त बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दी गई। सरकार अगले सप्ताह में मानसून सत्र के दौरान इस संशोधित विधेयक को संसद में पेश करने की तैयारी में है। इस बिल में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कड़े प्रावधान होंगे। बिल में पेपर लीक के मामलों में 10 की सजा और 10 करोड़ के जुर्माना का प्रावधान होगा।इस नए संशोधन में स्पेशल फॉस्ट ट्रैक कोर्ट को लीगल बैंकिग मिलेगी। पेपर लीक के खिलाफ नए विधेयक में फास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन महीनों में सुनवाई करने और फैसला देने को कहा जाएगा। पेपर लीक मामले में 10 साल की सजा और 10 करोड़ के जुर्माना का प्रावधान होगा। पेपर लीक संसोधन विधायक अगले हफ्ते ही संसद में पेश किया जाएगा।

प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव:
इसके अलावा सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल भी किया है।आईएएस रैंक के नरेश पाल गंगवार को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया था। वह 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी हैं, जो वर्तमान सचिव विनीत जोशी की जगह लेंगे।

एनटीए के 47 अधिकारी बर्खास्त:
एजुकेशन सिस्टम और एग्जाम आदि में बड़े सुधार की दिशा में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (हृञ्ज्र)ने बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, हृञ्ज्रने 47 अधिकारियों को टर्मिनेट कर दिया है. इसके साथ ही कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी. सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई हृञ्ज्रमें बड़े सुधार और जवाबदेही तय करने के लिए शुरू किए गए बड़े अभियान का हिस्सा है. मंत्रालय का कहना है कि आने वाले दिनों में एजेंसी में सुधार से जुड़े और भी कई अहम कदम उठाए जाएंगे. गौरतलब है कि हाल के समय में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर हृञ्ज्रलगातार विवादों में रही है।

वायुसेना की तैनाती स्थायी ईलाज नहीं:
नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है और गलतियों के सिलसिले को तुरंत रोकने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए केंद्र से पूछा कि पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन मोड में बदलने और डेटा को सुरक्षित रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष पूरी स्थिति और रोडमैप रखने के लिए कुछ और समय की मांग की है।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को NEET-UG पेपर लीक के बाद सुधारों को लागू करने में हुई प्रगति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि हलफनामे में कामचलाऊ उपायों पर निर्भर रहने के बजाय सुधारों को संस्थागत बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताया जाना चाहिए।