भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण

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हैदराबाद: भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपने पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 का शनिवार को सफल प्रक्षेपण कर दिया। हैदराबाद स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस रॉकेट ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से दोपहर 12:08 बजे सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस सफलता के साथ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने एक नए युग में प्रवेश कर लिया है। रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के बाद देशभर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल की यह सफलता देश के तेजी से उभरते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि स्पेस टेक्नोलॉजी और बढ़ती स्पेस इकोनॉमी में भारत की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है तथा वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में देश की स्थिति को और मजबूत करेगी।

अत्याधुनिक विशेषाताओं से लैस है विक्रम-1:
तकनीकी दृष्टि से विक्रम-1 कई अत्याधुनिक विशेषताओं से लैस है। यह लगभग 350 किलोग्राम तक के पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा में 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचाने में सक्षम है। इसके ऊपरी चरण में पूरी तरह 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन का उपयोग किया गया है, जबकि इसका मुख्य ढांचा ऑल- कार्बन कंपोजिट सामग्री से निर्मित है, जिससे इसका वजन कम और मजबूती अधिक बनी रहती है। रॉकेट के पहले तीन चरणों में ठोस ईंधन तथा चौथे चरण में तरल ईंधन का इस्तेमाल किया गया है। इसे विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए डिजाइन किया गया है।