शिवपुरी में तोप चोरी का मामला नए मोड़ पर

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शिवपुरी (मध्य स्वर्णिम): एतिहासिक नरवर किले से 16वीं शताब्दी की एक दुर्लभ तोप चोरी होने का मामला सामने आया है। शुरुआती जांच में जिस तरह की कहानी सामने आई थी, वह बाद में पूरी तरह बदल गई। पहले दावा किया गया था कि 25 से 30 हथियारबंद बदमाश चौकीदार को धमकाकर तोप लूटकर ले गए, लेकिन पुलिस जांच में यह दावा सही नहीं पाया गया। जानकारी के मुताबिक, भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल-दमयंती की पावन स्थली माने जाने वाले नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की 14 एतिहासिक तोपें रखी थीं। इनमें से एक तोप चोरी हो गई है, जबकि बाकी 13 तोपें सुरक्षित हैं। मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब चौकीदार बाल किशन ने अपना बयान बदल दिया। उसने पुलिस और पुरातत्व विभाग को बताया कि पांच जुलाई को कुछ अज्ञात लोगों ने तोप को उसके स्थान से नीचे गिरा दिया था। इसकी सूचना उसने तत्काल विभाग को दे दी थी। इसके बाद 15 जुलाई की रात करीब आठ बजे वह किला छोड़कर अपने घर चला गया। इसी दौरान अज्ञात चोर नीचे पड़ी तोप उठाकर ले गए। राज्य पुरातत्व विभाग के उपसंचालक पी.सी. महोबिया ने बताया कि घटना के समय चौकीदार ड्यूटी पर मौजूद नहीं था, जिससे चोरी की वारदात हो सकी। उन्होंने कहा कि 5 जुलाई को तोप नीचे गिराए जाने की सूचना मिलने के बाद विभाग अपनी ओर से कार्रवाई कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही चोरी हो गई।

हद दर्जे की लापरवाही:
सबसे लापरवाही वाली बात यह है कि बदमाशों ने इस बड़ी वारदात का ‘ट्रेलर’ 5 जुलाई को ही दिखा दिया था, जब उन्होंने इस भारी-भरकम तोप को चुराने के मकसद से नीचे गिरा दिया था। मगर वजन ज्यादा होने की वजह से वे उस दिन इसे ले जा नहीं सके थे। इसके बावजूद पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया और सुरक्षा बढ़ाने के बजाय इसे एक सामान्य चोरी का प्रयास मानकर छोड़ दिया।

करोड़ों की है कीमत:
चोरी गई यह ऐतिहासिक तोप सिंधिया राजवंश के समय की है, जो पीतल, तांबे, कांसे और अष्टधातु के विशेष मिश्रण से बनी है। इस पर खास राजचिह्न के साथ फारसी और देवनागरी लिपियां अंकित हैं। ऐतिहासिक महत्व के चलते वैसे तो यह अमूल्य है, लेकिन इंटरनेशनल ब्लैक मार्केट में 16वीं शताब्दी की ऐसी अष्टधातु तोपों की कीमत करीब 2 से 5 करोड़ रुपये तक आंकी जाती है।