नागरिकता तय नहीं कर सकता चुनाव आयोग, नागरिकता पर चुनाव आयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख

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नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक तौर पर यह बात दोहराई है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में मतदाता सूची से नाम कटने भर से किसी की नागरिकता अपने आप खत्म नहीं हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि वह बिहार एसआईआर पर अपने फैसले में ही यह बात स्पष्ट कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट में भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना ने प्रसेनजीत बोस नाम के याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। लाइवलों के अनुसार वे कई याचिकाओं के माध्यम से एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट से बाहर हुए लोगों के लिए कई तरह की राहत चाहते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत के सामने कहा कि बंगाल में जिनके नाम एसआईआर में कटे हैं, उनकी अपील पर सुनवाई की प्रक्रिया बहुत ही धीमी चल रही है। लेकिन, फिर भी पश्चिम बंगाल सरकार ऐसे लोगों का नाम कल्याणकारी योजनाओं से काट रही है और उन्हें इसके लाभ से वंचित किया जा रहा है। दलील दी गई कि जाति प्रमाण पत्र देने से भी मना किया जा रहा है।