आदिवासियों ने किया ‘चिता आंदोलन’

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छतरपुर (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में संचालित केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय मध्यम, झ, नैगुवा सिंचाई और एनटीपीसी परियोजनाओं के विरोध में स्थगित ‘चिता आंदोलन’ एक बार फिर शुरू हो गया है। आंदोलनकारी न्याय दो या मार दो के नारे के साथ केन- बेतवा प्रभावित कुपी गांव के पास केन की सहायक बराना नदी के किनारे धरना दे रहे हैं। इस चिता आंदोलन का नेतृत्व आदिवासी महिलाएं कर रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलन के नेता अमित भटनागर ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के भ्रष्ट और तानाशाहीपूर्ण रवैये के कारण लगभग 50 हजार लोग बेघर हो गए हैं। उनके अनुसार, लोग अपने जल, जंगल, जमीन, आजीविका और सांस्कृतिक विरासत से बेदखल हो चुके हैं। अमित भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण 46 लाख पेड़ों, पत्रा टाइगर रिजर्व और केन नदी को अपूरणीय पर्यावरणीय क्षति पहुंचेगी। उन्होंने इसे पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बताया ।