भोपाल (मध्य स्वर्णिम): राजधानी भोपाल को स्मार्ट बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए स्मार्ट डस्टबिन अब खुद बदहाली की तस्वीर बन गए हैं। करीब 13.50 करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए 190 स्मार्ट डस्टबिन में से कई खराब हो चुके हैं, कई जंग खा रहे हैं और कई कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। ऐसे में करोडों की इस परियोजना की उपयोगिता और रखरखाव पर सवाल उठने लगे हैं। भोपाल स्मार्ट सिटी ने वर्ष 2018 में शहर में रियल टाइम कचरा संग्रहण व्यवस्था शुरू करने के लिए पहले चरण में 40 और बाद में 150 स्मार्ट डस्टबिन लगाए थे। इन डस्टबिन में सेंसर तकनीक लगाई गई थी, जो कचरा भरने पर कंट्रोल रूम को सूचना भेजती थी । इसके बाद कचरा वाहन को अलर्ट मिलना था, ताकि समय पर डस्टबिन खाली किए जा सकें । योजना के तहत दावा किया गया था कि इससे कचरा संग्रहण व्यवस्था आधुनिक और प्रभावी बनेगी। प्रत्येक स्मार्ट डस्टबिन में करीब दो टन कचरा रखने की क्षमता भी बताई गई थी ।
स्मार्ट सिटी ने दी सफाई:
भोपाल स्मार्ट सिटी के जनसंपर्क अधिकारी का कहना है कि कुछ डस्टबिन नहीं खरीदे गए थे। उन्होंने बताया कि बाद में केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन की गाइडलाइन के तहत शहर को डस्टबिन फ्री बनाने का निर्णय लिया गया, जिसके बाद कई स्थानों से डस्टबिन हटाए गए। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए डस्टबिनों का अब क्या उपयोग हो रहा है और वे खुले में क्यों पड़े हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डस्टबिन हटाने थे तो करोड़ों रुपये खर्च कर इन्हें लगाया क्यों गया? यदि योजना बदली तो सार्वजनिक धन से खरीदे गए उपकरणों का उचित उपयोग क्यों नहीं हुआ? अब करोड़ों की यह परियोजना सवालों के घेरे में है।




