धान की फसल पर भी देंगे भावांतर योजना का लाभ

0

भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे हलधर किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, इस धरा के वास्तविक शुभंकर है। वे अपने अथक परिश्रम से पूरे समाज का उदर-पोषण करते हैं। किसानों की खुशहाली ही हमारी सरकार का संकल्प हैं क्योंकि किसान समृद्ध होगा, तभी हमारा प्रदेश और देश समृद्ध होगा । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल की धरती धान उत्पादन के लिए जग प्रसिद्ध है। शेर की दहाड़ और सतपुड़ा के पहाड़ और अब यहां की छत्रिय धान इस क्षेत्र की बड़ी पहचान है। छत्रिय धान को अब भौगोलिक संकेतक टैग (जीआई टैग ) मिल गया है। यह हमारी देशज और पारंपरिक कृषि का वैश्विक सम्मान है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के धान उत्पादक किसानों के हित में बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब धान की फसल पर भी भावांतर योजना का लाभ दिया जाएगा। र राज्य सरकार धान उत्पादक किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के बीच के अंतर की राशि का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत जी – राम जी योजना ( मनरेगा का नया स्वरूप) के तहत प्रदेश में विभिन्न श्रेणी के कार्यम लगातार चलायें जाएंगे। किसानों और रोजगार के जरूरतमंदों को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को सिवनी जिला मुख्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय धान महोत्सव को संबोधित कर रहे थे । इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत प्रदेश के 3 हजार 941 किसानों को 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से कोदो-कुटकी के बोनस के रूप में 2 करोड़ 84 लाख रुपए किसानों के खातों में अंतरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार श्रीअन्न उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ बोनस भी दे रही है। हमने प्रदेश में पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो कुटकी खरीदने के लिए अभियान शुरू किया है।

श्रीअन्न उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार के प्रयास:
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने श्रीअन्न (मिलेट) उत्पादक किसानों के हित में रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना को लागू करने का फैसला लिया है। वैल्यू चेन का निर्माण कर किसानों को मार्केट एक्सेस प्रदान किया जा रहा है। कोदो-कुटकी के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की व्यवस्था विकसित की जा रही है। नर्मदा मिलेट्स ब्रांड के माध्यम से मध्यप्रदेश के श्रीअन्न को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत 1 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश के 15 प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग 4 हजार किसानों से लगभग 3 हजार मीट्रिक टन कोदो-कुटकी का उपार्जन किया गया। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 40 हजार मीट्रिक टन कोदो-कुटकी उपार्जन का लक्ष्य रखा है। सरकार द्वारा डिंडौरी में मध्यप्रदेश राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जा रही है।