नितिन दत्ता, तामिया / छिन्दवाड़ा (मध्य स्वर्णिम): तामिया के मुख्यमार्ग में झिरिया मुहल्ले में रातो रात सरकारी भूमि पर मंदिर चबूतरा विवाद में जिला कलेक्टेट हरेंद्र नारायण के निर्देश पर तहसीलदार संजय मसराम ने बड़ी कार्यवाही करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की । इस विवाद की जानकारी जिला कलेक्टर तक पहुचने के बाद स्थानीय प्रशासन सुबह से ही ताबड़ तोड़ कार्यवाही की। तजसीलदार संजय मसराम ने विधि सम्मत कार्यवाही करते हुए अवैध रूप से निर्मित चबूतरा तुडवा दिया। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट गाइडलाईन के बाद सरकारी भूमि में अवैध रूप से धार्मिक उन्माद फैलाने की नीयत से किये गए अवैध मंदिर चबूतरा निर्माण मामले में तहसीलदार ने बीते पांच दिनों में कथित दबाब को दरकिनार करते हुए पांच लोगों को शांति भंग में बांड ओव्हर करते हुए शनिवार को अवैध निर्माण हटवा दिया। इस कार्यवाही में पटवारी राजस्व निरीक्षक,ग्राम पंचायत सचिव पुलिस बल मौजूद रहा। सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन के बाद रातोरात सरकारी भूमि में अवैध निर्माण का मामला जिला कलेक्टर हरेंद्र नारायण तक पहुंचा था । सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद भी सरकारी जमीन में रातोरात अवैध रूप से मंदिर बनाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की चुप्पी संदेह के घेरे में है । तामिया में पहले ही चौरापठार की जमीन का मामला पूरे प्रदेश में सुर्खियों में है । तामिया में 23 जून की रात्रि को झिरिया मुहल्ले की सरकारी जमीन में धार्मिक उन्माद फैलाने की नीयत से रातोरात सामने चल रहे निर्माण कार्य की सामाग्री से ही अवैध रूप से चबूतरा (मंदिर) बनाकर शिव लिंग स्थापित कर दिया इस मामले की शिकायत होने पर 24 जून को प्रशासन सक्रिय हुआ मौके पर पहुंचा लेकिन कथित विवाद के बाद अवैध अतिक्रमण हटाने की कोई कार्यवाही नही हुई ।
क्या है मामला:
तामिया मुख्यमार्ग किनारे स्थित झिरिया मोहल्ला में बीते 14 जून को को स्थानीय अनिल साहू द्वारा लिखित शिकायत कर निर्माण सामाग्री फेक कर अभद्रता किये जाने की शिकायत तामिया पुलिस थाने के साथ तहसीलदार तामिया को की गईं थी। इस शिकायत पर कोई कार्यवाही नही हुई। तामिया के झिरिया मुहल्ला में रातो रात अवैध रूप से सरकारी भूमि में रात्रि 2 बजे चबूतरा बनाकर उसमें शिवलिंग स्थापित कर दिया गया। 24 जून की सुबह दूसरी बार तहसीलदार और टीआई को लिखित सूचना के बाद मौके पर कार्यवाही के लिए पटवारी शत्रुघन कुमरे,राजस्व निरीक्षक हरवंश ठाकुर, सहायक उपनिरीक्षक रामकिशन बरमैया, आरक्षक संतोष सलामे तथा ग्राम पंचायत के सरपंच और कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे।
इनका कहना है:
अवैध निर्माण मामले में पहले ही 5 आरोपियों पर मामला दर्ज कर बांड ओव्हर किया गया।था जिला कलेक्टर के निर्देश पर रातो रात हुए अवैध निर्माण हटाये जाने की कार्यवाही की गई है।
संजय मसराम,तहसीलदार तामिया
ये है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाईन:
सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल (मंदिर, मस्जिद या अन्य) का निर्माण अवैध है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए धार्मिक स्थलों को हटाने में कोई ढील नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के प्रमुख निर्देश: सख्त रुख: सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि अवैध निर्माण, अवैध निर्माण ही होता है और इस पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए। धर्म की आड़ में सार्वजनिक भूमि के अतिक्रमण को अनुमति नहीं दी जा सकती।सड़कों और पार्कों की सुरक्षा: 2013 में कोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों, और पार्कों की जमीन पर धार्मिक ढांचे या मूर्तियां बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। हाईकोर्ट के आदेशों का समर्थन: विभिन्न उच्च न्यायालयों (जैसे मद्रास और केरल हाईकोर्ट) ने भी सरकारी या सार्वजनिक उपयोग की जमीन (तालाब, बस स्टैंड आदि) पर बने अवैध मंदिरों और अन्य ढांचों को हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की जवाबदेही: राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन (नगर निगम/प्रशासन) को यह आदेश दिया गया है कि वे बिना अनुमति के सरकारी जमीन पर बने ऐसे अवैध निर्माणों को पहचानें और उन्हें हटाने की कार्रवाई करें।




