भोपाल (मध्य स्वर्णिम): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्यप्रदेश भ्रमण के पहले दिन गुरुवार को बैतूल में आयोजित आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन में विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी / स्टॉल का अवलोकन कर जनजातीय समुदाय की महिलाओं के द्वारा निर्मित पारंपरिक उत्पादों की प्रशंसा की । राष्ट्रपति मुर्मू ने महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बैतूल में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की । उन्होंने बैतूल जिले की स्व-सहायता समूह की महिलाएं सतपुडांचल प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से रागी, कोदो, कुटकी ज्वार एवं बाजरा जैसे पोषक तत्वों से भरपूर श्रीअन्न से बने कुकीज, पास्ता, नूडल्स, इंस्टेंट इडली डोसा, मिक्स दलिया तथा अन्य स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों का निर्माण कर रही है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल, केन्द्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य विभाग दुर्गादास उईके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल भी अवलोकन के दौरान उपस्थित रहे। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने वोकल फॉर लोकल, लखपति दीदी एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में विभिन्न स्व-सहायता समूह द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की । राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि उत्पादों के निर्माण से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है। स्व- सहायता समूह से जुड़ी हुए महिलाएं भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अपनी महती जिम्मेदारी निभा रही हैं। प्रदर्शनी में सतपुडांचल प्रोड्यूसर कंपनी में 175 स्व सहायता समूह के 2075 समूह विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का संचालन कर प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं ।
जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता की मार्गदर्शक:
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति में आत्म विश्वास, आत्म सम्मान, जागरूकता और दायित्व बोध का विकास हो। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज आत्म सम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति का अनुभव कराती है तथा सकारात्मक सोच को जीवन के उच्च आदर्शों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। राष्ट्रपति मुर्मू बैतूल में आयोजित आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन को संबोधित कर रही थी। विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। शाश्वत विकास वही है जो हमारी जड़ों को मजबूत बनाते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्यप्रदेश के समग्र विकास को देखकर आंनदित हो गई। प्रदेश के प्रवास पर आई मुर्मू ने दिनभर के व्यस्त कार्यक्रमों में विभिन्न जिलों में मध्यप्रदेश की सर्वांगीण उन्नति को देखकर अभ्युदय मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री की कल्पना को जमीन पर साकार होते देखकर प्रफुल्लित हो गई। इस यात्रा के दौरान महामहिम राष्ट्रपति ने जनजातीय बाहुल्य बैतूल, संस्कारों की आध्यात्मिक ओंकारेश्वर में अपना पूरा समय दिया। उससे पहले इंदौर एयरपोर्ट पर मध्यप्रदेश आगमन पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्रीमंडल के सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों ने आत्मीय अभिनंदन किया।




