एसआईटी की जांच पर नाराज हाईकोर्ट

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के श्योपुर, गुना और अशोकनगर जिलों में अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों की जमीनों पर अवैध कब्जे और उन्हें बंधुआ मजदूर बनाने के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम की कार्यप्रणाली पर बेहद तीखी नाराजगी जताई है। जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट को महज एक छलावा करार देते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि अफसर अपनी जिम्मेदारी से भागना चाहते हैं । अदालत ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, यह वाकई चौंकाने वाला है कि यह कोर्ट आदिवासियों के संभावित शोषण को लेकर लगातार चिंता जता रहा है, लेकिन राज्य के अधिकारी अपने एसी कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं । कोर्ट ने पाया कि एसआईटी ने धरातल पर जाकर कोई फिजिकल सर्वे नहीं किया। जांचकर्ताओं ने यह भी देखने की जहमत नहीं उठाई कि आदिवासियों की जमीन की रजिस्ट्री और पावर ऑफ अटॉर्नी किसने करवाई, जमीन पर असल कब्जा किसका है और क्या फसल बेचने के बाद पैसे आदिवासी किसानों के खातों तक पहुंचे भी या नहीं । अब जमीन पर होगी जांच: हाई कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेड़कर ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अब कागजी खानापूर्ति बंद होगी । एसआईटी की टीम सीधे प्रभावित गांवों में जाएगी, आदिवासी परिवारों से सीधे संवाद करेगी और हर एक मामले की बारीकी से जांच कर एक नई और तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करेगी । अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 जुलाई की तारीख तय की है।

अब जमीन पर होगी जांच:
हाई कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेड़कर ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अब कागजी खानापूर्ति बंद होगी। एसआईटी की टीम सीधे प्रभावित गांवों में जाएगी, आदिवासी परिवारों से सीधे संवाद करेगी और हर एक मामले की बारीकी से जांच कर एक नई और तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करेगी। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 जुलाई की तारीख तय की है।