नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने नामांकन खारिज करने के रिटर्निंग आफिसर के आदेश को चुनौती देने वाली मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज कर दी कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्हें जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत चुनाव याचिका दाखिल करने की छूट दी है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और एएस चंदुरकर की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 329 के प्रतिबंध का हवाला देते हुए अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई नटराजन की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी पीठ ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए का प्रावधान यहां प्रासंगिक है। उम्मीदवार द्वारा जानकारी प्रस्तुत करने की आवश्यकता कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 के नियम 4ए में निर्धारित की गई है। नियम 4ए के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार को रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष नामांकन पत्र प्रस्तुत करते समय अपने द्वारा शपथपूर्वक सत्यापित एक हलफनामा (एफिडेविट ) भी जमा करना होता है। फॉर्म 26 में उन जानकारियों का विवरण दिया गया है, जिनका उम्मीदवार को अपने हलफनामे में खुलासा करना अनिवार्य है। फॉर्म – 26 का खंड (क्लॉज) 5 नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवार द्वारा प्रदान की जाने वाली सूचनाओं से संबंधित है। न्यायालय ने कहा कि ऐसा कोई भी व्याख्या, जिसके तहत नामांकन पत्र खारिज किए जाने के मामलों में इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप किया जाए और अन्य मामलों को चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती देने के लिए छोड़ दिया जाए, उसे प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया | सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान अनुच्छेद 32 या 226 के तहत न्यायिक हस्तक्षेप करना अनुच्छेद 329 के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। पीठ ने कहा कि यदि नामांकन निरस्तीकरण जैसे मामलों में ‘स्पष्ट या गंभीर त्रुटि के आधार पर भी अदालत हस्तक्षेप करने लगे, तो इससे संविधान में निर्धारित चुनावी प्रक्रिया की संरचना प्रभावित होगी। अदालत ने कहा कि इस तरह की स्थिति में हस्तक्षेप का कोई अलग वर्ग बनाना संविधान में परिकल्पित नहीं है। न्यायालय ने पोनुस्वामी मामला का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप केवल चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) के माध्यम से ही संभव है और यह सिद्धांत लगातार लागू रहा है। पीठ ने यह भी कहा कि यदि अदालत ऐसे मामलों में अलग-अलग श्रेणियां बनाकर कुछ मामलों में हस्तक्षेप करे और कुछ को चुनाव न्यायाधिकरण के लिए छोड़ दे, तो यह अनुच्छेद 329 की भावना के विपरीत होगा ।
अगला कदम पार्टी तय करेगी : मीनाक्षी
राज्यसभा नामांकन को खारिज किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि मैं पार्टी की प्रतिनिधि हूं और अब पार्टी ही अगला कदम तय करेगी। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करूंगी। नटराजन ने कहा कि जहां तक मेरी समझ है, ये कोई झटका नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग में अपील की जाए, तो उस पर चर्चा होगी।




