सिंहस्थ 2028 से पूर्व सदानीरा हो जाएंगी शिप्रा

0

भोपाल (मध्य स्वर्णिम): सिंहस्थ- 2028 के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी में शुद्ध और पर्याप्त जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई जा रही सेवरखेड़ी- सिलारखेड़ी परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है । जल संसाधन विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और आगामी मानसून में इसकी पहली बड़ी तकनीकी टेस्टिंग की जाएगी। 445 करोड़ रुपये की इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शिप्रा नदी को बारहमासी जल उपलब्ध कराना है। इसके तहत सेवरखेड़ी में 5.5 मीटर ऊंचा और 100 मीटर लंबा बैराज लगभग तैयार हो चुका है । यहां एकत्रित बरसाती पानी को 5.5 किलोमीटर लंबी और 3000 मिमी व्यास की पाइप लाइन के माध्यम से सिलारखेड़ी पहुंचाया जाएगा । सिलारखेड़ी स्थित पुराने तालाब को बड़े जलाशय के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 22 मीटर ऊंचा और 6.5 किलोमीटर लंबा बांध बनाया जा रहा है, जिसका लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना के तहत जल संग्रहण क्षमता को 5 मिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़ाकर 51 मिलियन क्यूबिक मीटर किया जा रहा है, जिससे वर्षभर पानी का भंडारण संभव हो सकेगा । इस परियोजना का निर्माण कार्य ग्वालियर की करण डेवलपर्स कंपनी द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 जनवरी 2025 को इस परियोजना का भूमिपूजन किया था । जल संसाधन विभाग का मानना है कि सिंहस्थ- 2028 के लिए स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मानसून में होगी पहली बड़ी टेस्टिंग:
आगामी मानसून में बैराज और बांध में पानी भरकर उनकी क्षमता, संरचनात्मक मजबूती और कार्यप्रणाली का परीक्षण किया जाएगा। यह परियोजना के लिए महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।परियोजना को मई 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दूसरे चरण में सिलारखेड़ी से त्रिवेणी घाट तक 6.30 किलोमीटर लंबी और 1300 मिमी व्यास की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। आवश्यकता पडऩे पर इसी पाइपलाइन के जरिए शिप्रा नदी में पानी छोड़ा जाएगा।