भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मप्र के कूनो की शान बने चीतों को तीन अन्य राज्यों में भी बसाने की प्लानिंग की जा रही है। इसकी शुरुआत जल्द ही मध्य प्रदेश से सटे गुजरात से की जा रही है। गुजरात के बन्नी में चीतों को बसाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। गुजराज के बाद राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के जंगलों में भी बसाया जाएगा। मध्य प्रदेश के गांधी सागर को मिलाकर कूनो नेशनल पार्क में अभी 53 चीते घूम रहे हैं। इनमें से एक राजस्थान की सीमा में जबकि शेष मध्य प्रदेश में हैं। मध्य प्रदेश के बाद जल्द ही गुजरात के बन्नी में चीतों को बसाए जाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गुजरात के कच्छ इलाके के बन्नी में चीतों को बसाया जाएगा। इसके लिए एनटीसीए पहले ही अनुमति दे चुका है | बन्नी में अगले एक साल में 12 चीतों को बसाए जाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
मप्र में 18 हजार वर्ग किलोमीटर में घूमेंगे चीता:
मध्य प्रदेश में अभी चीता 5 हजार वर्ग किलोमीटर में घूम रहे हैं। यह पूरा एरिया कूनो के आसपास लगा जंगली क्षेत्र है। उत्तम शर्मा कहते हैं, कूनो से गांधीसागर के बाद जल्द ही नौरादेही भी चीतों का नया घर बनने जा रहा है। उधर नौरादेही के बाद माधव नेशनल पार्क में भी चीतों को बसाए जाने की तैयारी है। इसके अलावा विभाग कूनो गांधी सागर मेटापॉपुलेशन लैंडस्केप को चीतों के लिए विकसित करने की तैयारी कर रहा है। कूनो से लेकर गांधी सागर तक का यह 18 हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र होगा, इसको तैयार किए जाने का काम चल रहा है।
बन्नी के बाद राजस्थान, छत्तीसगढ़ और यूपी में पहुंचेंगे चीते:
कूनो टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा कहते हैं कि चीता हमेशा से भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर का केन्द्र रहा है। प्रदेश के खरबई में 6 हजार साल पहले की पेंटिंग में चीता दिखाया गया है, जो दिखाता है कि हिमालयी क्षेत्र को छोडकऱ पूरे देश में चीता पाया जाता था। इसलिए चीता को मध्य प्रदेश के अलावा दूसरा क्षेत्र भी पसंद आएगा। एमपी में अभी चीता कूनो के आसपास के 5 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में घूम रहा है। कूनो से निकलकर कई चीते राजस्थान तक पहुंचे बाद में वापस भी आए गए। चीता को गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश के संजय डुबरी के क्षेत्र में भी बसाए जाने की योजना है। यह क्षेत्र मध्य प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास नेशनल पार्क, राजस्थान के बांरा स्थित शेरगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य में भी बसाए जाने की योजना है।




