भोपाल (मध्य स्वर्णिम): राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस में अब अंदरूनी लॉबिंग खुलकर सामने आने लगी है। दिल्ली में नेताओं के लगातार दौरे हो रहे हैं। संगठन ऐसे उम्मीदवार की तलाश में है जो जातीय, क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरण साध सके । पार्टी नेतृत्व भी इस सीट को हल्के में लेने के मूड में नहीं है, क्योंकि यह सीट सिर्फ राज्यसभा की नहीं बल्कि प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक ताकत का भी बड़ा संदेश मानी जा रही है | मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। इनमें दो सीटें भाजपा के खाते की मानी जा रही हैं, जबकि कांग्रेस के सामने अपनी एकमात्र सीट बचाने की चुनौती है । संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस सीट निकाल सकती है, लेकिन पार्टी को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। यदि भाजपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो मुकाबला बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण हो सकता है । कांग्रेस नेताओं को आशंका है कि मतदान के दौरान कुछ विधायक रणनीति बदल सकते हैं। यही वजह है कि पार्टी अब हर विधायक पर नजर बनाए हुए है।कांग्रेस की सबसे बड़ी हलचल की वजह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का फैसला माना जा रहा है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि वे इस बार राज्यसभा नहीं जाना चाहते। साथ ही उन्होंने पार्टी नेतृत्व से किसी नए चेहरे को मौका देने की बात कही है। दिग्विजय सिंह ने अनुसूचित जाति वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने की इच्छा भी जताई है। इसके बाद से कांग्रेस में दावेदारों की कतार लंबी हो गई है।




