तड़पती देह पर सुलगता परिवार

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प्रसंगवश (मध्य स्वर्णिम): राकेश व्यास (मो. 9977701999)
ये कहानी नहीं बल्कि एक समाज में बढ़ती मानसिक विकृतियां है। पिछले बारह दिन से राजधानी में एक टेलीविजन अभिनेत्री की कथित आत्महत्या भारत में सुर्खियां बटोर रही है, क्योंकि मॉडल, एक्ट्रेस, ट्विशा शर्मा की देह एम्स की मर्चुरी में न्याय के लिए रखा गया है। ट्विशा के परिजनों ने यह मांग सीएम मोहन यादव से मिलकर की थी अब ट्विशा शर्मा की मौत मामले की जांच सीबीआई करेगी जिसकी अनुशंसा मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग ने जारी किया है । इसे लेकर एमपी सरकार ने सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री से आश्वाशन भी मिला की आप के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा और परिवार को न्याय जरूर दिलवाएंगे। दरअसल, ट्विशा शर्मा के परिजन लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर पूर्व आर्मी अधिकारियों के साथ ट्विशा के परिजनों ने सीएम मोहन यादव से मुलाकात की थी। पूर्व जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई को हुई थी और 13 मई को पोस्टमार्टम हो गया है लेकिन ट्विशा के परिजनों ने शव नहीं लिया है। परिजनों का कहना है कि उसने आत्महत्या नहीं की बल्कि उसकी हत्या हुई है। परिजनों ने मांग की थी कि उसके शव का पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स में कराया जाए। लेकिन भोपाल कोर्ट ने इस याचिका को ठुकरा दिया है। इसके बाद ट्विशा के परिजनों ने हाईकोर्ट का रूख दिया है । जिसे हाईकोर्ट से मंजूरी मिल गई। अभी तक ट्विशा के पति समर्थ सिंह फरार चल रहा है। उस पर 30000 रूपए इनाम रखा गया है वैसे तो पुलिस किसी बड़े अधिकारी का मोबाइल गुम जाने के चोबीस घंटे बाद आरोपी को पकड़ लेती है पर वही पुलिस इस में लचर नज़र आ रही है बहरहाल बात पुलिस की नहीं अपने देश के कार्यप्रणाली की है छोटा हमेशा फसता है और बड़े आराम से छूट जाते है। वैसे मिडिया और कई अन्य संस्थएं ने जब प्रशासन पर जोर देने लगी तो पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए गिरिबाला सिंह को तीसरा और अंतिम नोटिस भेजा है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के मुताबिक, यदि वे जांच में सहयोग नहीं करती हैं, तो पुलिस उनकी अग्रिम जमानत रद्द कराने के लिए कोर्ट जाएगी। इधर, ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा भी हाई कोर्ट पहुंच चुके हैं, ताकि गिरिबाला सिंह की रसूख के कारण जांच प्रभावित न हो और उनकी जमानत तुरंत रद्द की जाए। मामला पेचीदा तब लगता है जब जाँच के नाम पर टालमटोल रहा पहले के समय के लोग कहते थे की शादी के कुछ साल तक लड़कियों को एडजस्ट करने में दिक्कत आती थी लेकिन अब समय वैसा नहीं रहा अब लड़कियां शादी के पहले ही सब क्लियर कर देती है । टिवशा की मृत्यु के बाद कई वीडियो सोशल मिडिया में आ रहे जिसमे उनकी शादी कार्यक्रम को दिखाया जा रहा है, जहां वो बहुत खुश है। उनके परिवार के लोग दोस्त सब का मानना है की टिवशा कभी आत्महत्या नहीं कर सकती वो सब का बहुत ध्यान रखती थी। सब का सम्मान करती हसमुख स्वभाव की थी शादी के बाद ऐसा न जाने क्या हुआ की वो ऐसे कदम उठाने को मजबूर हो गई ये समझ के परे है। क्या अभी भी वही पुरुष प्रधान देश है जहाँ महिलाओ को आज़ादी नहीं मिल पा रही या ऐसा समझे महिलाओ को जीने के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। समाज की मानसिक विकृति वजह से चुप रहना और सहना जायज है लड़की अगर ससुराल में खुश नहीं और वो माँ बाप को बोल रही तो फिर क्यों उस को माता पिता अपने घर ले कर नहीं आएं हो सकता है लड़की ने अपने पसंद से शादी की इस लिए वो घर वालो पर जोर नहीं दिया टिवशा की मौत ने ये उजागर कर दिया की आज भी भारत में महिलाये मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक खोखलेपन की शिकार हो रही है। वैसे सजा का पात्र वो अपरिपक्व लड़का या अत्यधिक अभिमानी सास और खोखला समाज, लाचार कानून व्यवस्था है क्योकि आज ये सब सही होते तो ऐसी घटना शायद नहीं होती । समाज हमेशा ये बोलता आया की रिश्ते निभाने की जबाबदारी बेटी की है। समाज में लड़कियों को अनुशासन में रखा जाता आया है, रखा जाता है और भी बदलाव न हुआ तो रखा जाता रहेगा और ऐसी टिवशा जैसी लड़कियां आत्महत्या (हत्या) होती रहेगी। मृत्यु के बाद टिवशा के सास ने कहा की वो ड्रग्स लेती थी वो डिप्रेस्शन में थी। उसके और लड़को के साथ अफेयर थे ये सब बात अगर वो लड़का टिवशा की फैमली को बताता और अगर उसके परिवार के लोग कोई कदम नहीं उठाते तो बात अलग थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। टिवशा के भाई और टिवशा की सास का एक ऑडिओ आया जिस पर उसका भाई पूछ रहा की शादी के पहले अगर टिवशा का अफेयर था। शादी के पहले की बात को शादी के बाद करने का क्या मतलब लेकिन टिवशा की सास जिस तरह से बोल रही उससे ऐसा लग रहा की हो सकता है इस वजह से टिवशा ने एबॉर्शन कराया हो। वैसे टिवशा के मेसेज के आधार बना कर सर्वप्रथम पुलिस को माँ बेटे पर कार्यवाई कर देना चाहिए था। आज पूरे देश में सब इन्साफ की गुहार लगा रहे है। अगर कानून के ज्ञाता रही टिवशा की सास खुद कानून के हवाले हो जाती तो शायद टिवशा के परिवार को दस दिन दर – दर नहीं भटकना पड़ता। अगर वो और उनका बेटा सही है तो उन्हें समर्पण कर देना चाहिए और कानून का सहयोग करना चाहिए। लेकिन जिस तरह टिवशा का पति गायब हुआ उससे लगता नहीं की सब सही था। खैर अब समाज और परिवार को ये समझना होगा उनका बेटा या बेटी अगर किसी तकलीफ में है तो हमेशा साथ रहे उन्हें ऐसा न छोड़े जिस कारण बाद में पछताना पड़े। इस दुःख में स्वानन्द किरकिरे की ये लाइन याद आई ‘औ’ री चिरैया नन्ही सी चिड़िया अंगना में फिर आजा रे’