भोजशाला मामले में सुनवाई हुई पूरी

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धार (मध्य स्वर्णिम): भोजशाला मामले में हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से चल रही सुनवाई अब पूरी हो गई है। कोर्ट ने सभी पक्षों के तकों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। लंबी चली बहस में सभी पक्षों ने मजबूती से अपने तर्क रखे हैं। भोजशाला के मालिकाना हक को लेकर वर्ष 2022 में हिंदू फंट फॉर जस्टिस की तरफ से इंदौर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी । विवादित परिसर भोजशाला है या कमाल मौला मस्जिद, इसे तय करने के लिए हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को सर्वे करने के लिए कहा था। एएसआई ने 98 दिनों तक सर्वे कर दो हजार से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि भोजशाला एक मंदिर था और उसे 12वीं शताब्दी में बनाया गया उसे 12वीं शताब्दी में बनाया गया था, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे पर आपत्ति दर्ज कराई थी और सर्वे की वीडियोग्राफी भी मुहैया कराने की मांग की थी। कोर्ट के निर्देश पर सभी पक्षकारों को वीडियोग्राफी भी मुहैया कराई गई थी । सुनवाई में हिंदू पक्ष की ओर मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने भोजशाला के मंदिर होने के तर्क रखे थे । उनका कहना था कि हिंदू समाज को भोजशाला में अनुच्छेद 25 के अनुसार पूजा का अधिकार मिले तथा मुस्लिम समाज को भोजशाला परिसर में किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज द्वारा की जा रही नमाज़ बंद हो । इसके अलावा भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त करने की मांग भी रखी गई। वहीं ब्रिटिश म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिमा को फिर भोजशाला में लाकर स्थापित करने की बात कही गई। सुनवाई के दौरान एएसआई ने भी अपना पक्ष रखा और कहा था कि वर्तमान ढांचा पहले के मंदिरों के हिस्सों से बनाया गया था।