भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश उभरते आईटी राज्य से आगे बढ़ते हुए नेक्स्ट जेन टेक्नॉलॉजी हब के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है। मध्यप्रदेश निश्चित ही आने वाले समय में देश की डिजिटल और तकनीकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में कार्य करेगा राज्य सरकार द्वारा जीसीसी, एआई, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, स्पेसटेक तथा एवीजीसी-एक्सआर जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में लागू की गई नीतियां प्रदेश को देश की नई तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित कर रही हैं। इन नीतियों से प्रदेश में वैश्विक निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार, नवाचार एवं कौशल विकास के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश तकनीक, नवाचार और कौशल आधारित विकास मॉडल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पॉलिसी – 2025 लागू की है। इस नीति से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टेक्नोलॉजी, अनुसंधान, एनालिटिक्स और साझा सेवाओं के केंद्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा पूंजीगत सब्सिडी, भूमि रियायत, किराया सहायता और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए वेतन अनुदान जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं इंदौर भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में विकसित हो रहा आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक बना रहा है। इंदौर सुपर कॉरिडोर में विकसित हो रहे विश्वस्तरीय आईटी पार्क हजारों रोजगार अवसर सृजित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर नीति- 2025 के माध्यम से चिप डिजाइन इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास और डिजाइन आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। नीति में पूंजीगत निवेश सहायता, भूमि रियायत, स्टॉम्प शुल्क प्रतिपूर्ति और विद्युत शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने के प्रावधान शामिल किये गये हैं। अनुसंधान आधारित कंपनियों और डिजाइन स्टार्ट-अप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। भोपाल और ग्वालियर में पीसीबी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की स्थापना के लिए हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव इस क्षेत्र में बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं। सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेश (वीएलएसआई) चिप डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम भी शुरू कर रही है जिससे भविष्य के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार हो सके। प्रदेश ‘स्पेसटेक नीति-2026’ जारी करने के साथ ही अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी नई उड़ान भर रहा है। ‘स्पेसटेक नीति-2026 का उद्देश्य प्रदेश को देश का अग्रणी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी केंद्र बनाना है। इस नीति के तहत उपग्रह निर्माण, भू-स्थानिक विश्लेषण, स्पेस स्टार्ट-अप्स और एडवांस्ड रिसर्च को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा 40 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता, अनुसंधान अनुदान और स्टार्ट-अप समर्थन उपलब्ध कराया जा रहा है | भोपाल में स्पेसटेक क्लस्टर विकसित करने के लिए केंद्र सरकारक उपक्रम ‘इन स्पेस’ के साथ काम किया जा रहा है। आईआईटी इंदौर, आईआईएसईआर भोपाल, आरआरकैट और एमपीसीएसटी जैसे संस्थानों की भागीदारी से प्रदेश में स्पेस इनोवेशन इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है।
ड्रोन तकनीक से बढ़ती साख:
ड्रोन प्रमोशन एंड यूसेज पॉलिसी-2025 से प्रदेश में ड्रोन निर्माण और ड्रोन आधारित सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि, भू- अभिलेख, आपदा प्रबंधन, ट्रैफिक मॉनिटरिंग, खनन और वन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। साथ ही मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना से युवाओं को ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।




