जबलपुर (मध्य स्वर्णिम): महाकौशल क्षेत्र और जबलपुर के पर्यटन की रीढ़ माने जाने वाले कान्हा नेशनल पार्क से लगातार आ रही बाघों की मौत की खबरों ने वन्यजीव प्रेमियों के साथ पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है। देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करने वाला कान्हा इन दिनों एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत को लेकर चर्चा में है। महज 9 दिनों के भीतर पूरी बाघ फैमिली खत्म होने से पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं । इस बीच एक और चर्चित नर बाघ ‘डिगडोला’ की मौत ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। लगातार हो रही घटनाओं ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है ।
संक्रमण बना मौत की वजह:
कान्हा प्रबंधन के अनुसार बाघिन और उसके चार शावकों की मौत खतरनाक संक्रमण के कारण हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यह वायरस सामान्य तौर पर श्वानों और बिल्लियों में पाया जाता है और संभवत: उसी संक्रमण ने बाघ परिवार को अपनी चपेट में लिया। वन अधिकारियों का तर्क है कि इस तरह के संक्रमण के मामले पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आ चुके हैं। हालांकि लगातार हो रही घटनाओं ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कान्हा नेशनल पार्क के डिप्टी
पर्यटकों और गाइडों में नाराजगी:
कान्हा में लगातार बाघों की मौत की खबरों से पर्यटकों और स्थानीय गाइडों में भी नाराजगी बढ़ रही है। वर्षों से पार्क में काम कर रहे गाइडों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में हो रही मौतों को केवल संयोग नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो कान्हा की पहचान और वहां का पारिस्थितिक संतुलन दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। गाइडों के मुताबिक बीते तीन महीनों में ही छह बाघों की मौत हो चुकी है और हर बार अलग- अलग कारण सामने आ रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले पालतू जानवरों की स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि कई संक्रमण घरेलू जानवरों से वन्यजीवों तक पहुंच सकते हैं।




