उज्जैन (मध्य स्वर्णिम): महाकालेश्वर मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है, जहां लड्डु प्रसाद की गुणवत्ता और शुद्धता के लिए एफएसएसएआई द्वारा 5 स्टार रेटिंग दी गई है। लड्डु की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कड़े प्रावधान तय किए गए हैं। इसके तहत लड्डू बनाने में शुद्ध घी, रागी, चना दाल, काजू, किशमिश व अन्य सामग्रियों का निर्धारित मात्रा में उपयोग किया जाता है । पैकेजिंग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बोर्ड और लेमिनेटेड पेपर का इस्तेमाल होता है, ताकि लड्डू लंबे समय तक ताजा बने रहें। यदि निर्माण में किसी भी प्रकार की गंभीर लापरवाही पाई जाती है, तो 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
ऐसी होगी लड्डू प्रसाद यूनिट:
50 हजार वर्गफुट क्षेत्र में 20 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा अन्नक्षेत्र में इस यूनिट का निर्माण किया गया है। इसमें बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल शामिल हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए वर्ष 2026-27 के लिए 40 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। अब लड्डू बनाने में आधुनिक मशीनों का उपयोग होगा। प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कड़े मापदंड तय किए गए हैं। आवेदन करने वाले के पास कम से कम 3 साल का खाद्य सामग्री निर्माण का अनुभव होना चाहिए।
मंत्रोच्चार के साथ बनती है प्रसादी:
लड्डू बनाने में देशी घी, बेसन, रागी, पिसी हुई शक्कर, सूखा मेवा, इलायची पाउडर, केसर और जायफल पाउडर का उपयोग किया जाता है। सभी सामग्री पूरी तरह सात्विक होती है और इसमें किसी प्रकार का प्रिजर्वेटिव या कृत्रिम रंग नहीं मिलाया जाता। विशेष बात यह है कि प्रसाद का निर्माण मंत्रोच्चार के साथ किया जाता है। घी, बेसन और रागी को धीमी आंच पर लंबे समय तक भुना जाता है, जिससे स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होती है।




