भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश में हर सीजन खाद वितरण के दौरान होने वाली अफरातफरी और लंबी कतारों से राहत देने के लिए सरकार ने डिजिटल पहल को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। ई – विकास पोर्टल के जरिए अब किसान घर बैठे टोकन बुक कर अपनी जरूरत के मुताबिक खाद प्राप्त कर सकेंगे जबलपुर, शाजापुर और विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई इस व्यवस्था को सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। नई प्रणाली के तहत किसान को उसकी जमीन के क्षेत्रफल और फसल के आधार पर ही खाद मिलेगा खाद के लिए ई-विकास के माध्यम से टोकन जनरेट होगा, जो तीन दिन तक वैध रहेगा। किसान यदि सहकारी समिति का सदस्य है तो संबंधित दुकानों का टोकन मिलेगा। यदि सदस्य नहीं है, तो उसे दूसरी दुकानें बताई जाएंगी। एक माह में किसी भी किसान को 50 बोरी से अधिक खाद नहीं मिलेगी। प्रदेश सरकार की इस पहल को भारत सरकार भी अपना रही है और कुछ स्थानों पर इसके पायलट प्रोजेक्ट चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। खरीफ सीजन हो रबी, हर साल खाद वितरण केंद्रों पर लंबी-लंबी लाइनें लगती हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति संभालने के लिए पुलिस बल भी तैनात करना पड़ता है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी लगते हैं। यह व्यवस्था लाइनों से छुटकारा दिलाने में सहायक सिद्ध हुई – विकास पोर्टल (https://evikas.mpkrishi. mp.gov.in/) के माध्यम से सुबह सात से शाम आठ बजे के बीच एग्रीस्टेक आईडी (फार्मर आईडी) में दर्ज रकबे (क्षेत्रफल) एवं फसल के आधार पर ऑनलाइन टोकन बुक कर खाद खरीद सकते हैं। खाद कौन सी लेना है, यह किसान ही तय करते हैं । किसान द्वारा खाद लेते ही विक्रय केंद्र के भंडार में से ऑनलाइन उतनी कमी दर्ज हो जाती है । इससे मांग और आपूर्ति का सिस्टम बना रहता है । मोबाइल पर ओटीपी के माध्यम से पंजीयन की प्रक्रिया करनी होती है। यदि किसान समय सीमा यानी 72 घंटे में खाद नहीं लेता है तो टोकन निरस्त हो जाएगा और दोबारा प्रक्रिया करनी होगी। यदि किसी किसान की भूमि पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रही है तो वह एसडीएम को आवेदन करेगा और वहां से टोकन बन जाएगा।
खाद की सीमा तय:
बुजुर्ग, दिव्यांग, बटाईदार आदि होने पर किसान किसी दूसरे व्यक्ति को खाद लेने के लिए अधिकृत कर सकता है। जमीन अधिक होने पर यदि किसी किसान की पात्रता 50 बोरी से अधिक है तो भी एक माह में 50 बोरी से अधिक खाद नहीं मिलेगी। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था बनाकर लागू की गई है।




