इंदौर (मध्य स्वर्णिम): मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने दावा किया कि धार शहर में किसी विशिष्ट मंदिर को किसी खास दौर में ढहाकर उस स्थान पर मस्जिद बनाए जाने का कोई भी सबूत नहीं है । इस याचिकाकर्ता ने भोजशाला मंदिर- कमाल मौला मस्जिद विवाद के मुकदमे में हिंदू पक्ष के दावे को खारिज करते हुए यह बात कही। हिंदू पक्ष के मुताबिक धार केपरमार राजवंश के राजा भोज द्वारा भोजशाला परिसर में वर्ष 1034 में बनवाया गया सरस्वती मंदिर मध्यकालीन भारत के शासक अलाउद्दीन खिलजी के हुक्म पर 1305 में ढहाया गया था। इसके अवशेषों का वहां मस्जिद के निर्माण में फिर से इस्तेमाल किया गया था। दरअसल, भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है । यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है।
अंबिका देवी की मूर्ति है:
खुर्शीद ने 2003 में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को भेजे कथित पत्र का हवाला दिया और यह दावा भी किया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता भोजशाला की वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहे हैं, वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है ।




