परिवहन विभाग है विशेष, कार्यप्रणाली बदलते उमेश

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खबर विशेष (मध्य स्वर्णिम): ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार (मो. 9425002527)
जब भी परिवहन विभाग का जिक्र होता है तो लोगों के दिमाग में परिवहन चेक पोस्ट पर होने वाली चौथवसूली याद आ जाती है और परिवहन विभाग को घृणा की दृष्टि से देखने लगते है। लेकिन ऐसा नहीं है कि इस विभाग में दूसरे कोई अच्छे कार्य नहीं हो रहे है या महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ आम लोगों को नहीं मिल रहा है। आज की हमारी इस खबर विशेष में हम उन चीजों पर प्रकाश डालेंगे, जिसमें परिवहन विभाग ने मुख्यमंत्री के मंशा के तहत काम भी किया है। जिसे संपादित करने का बीड़ा 1997 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अफसर और परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने बतौर अपने टीसी के रूप में दूसरी पदस्थापना में उठाया है। जिसमें वे सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और नागरिक सुविधाओं पर विशेष जोर दे रहे है। इसके लिए प्रदेश के अधिकतर जिलों में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे है। ताकि अधिक से अधिक लोगों को विभाग से मिलने सुविधाओं की जानकारी मिल सके। बताते है कि देश में 600 ऐसे शहर है जहां पर सड़क दुर्घटना का अनुपात सबसे अधिक है। इसमें मध्यप्रदेश के 6 शहर (सागर, जबलपुर, रीवा, सतना, खरगोन, धार) शामिल है, जहां पर सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती है। जिसे कम करने के लिए परिवहन विभाग लगातार भरसक प्रयास कर रहा है। इसी तरह राज्य में कुल 481 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए है। जिसे रोड सेफ्टी कमेटी द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के तहत संबंधित विभाग के साथ मिलकर कम करने का प्रयास जारी है। जानकारी के अनुसार परिवहन विभाग राहगीर योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला महत्वपूर्ण घंटा) के भीतर अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति (गुड सेमेरिटन) को 25000 का नकद पुरस्कार और सम्मान पत्र देता है। इसका उद्देश्य घायलों को समय पर सहायता दिला के जान बचाना है । इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करना और लोगों को मदद के लिए प्रेरित करना है। लेकिन इस योजना में सबसे खास बात यह है कि मददगार को अस्पताल में अनावश्यक पूछताछ या पुलिस द्वारा परेशान नहीं करने का प्रावधान है। इसी तरह एक और महत्वपूर्ण योजना पीएम राहत योजना (प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल में भर्ती और सुनिश्चित उपचार योजना) फरवरी 2026 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी। जिसके क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश परिवहन विभाग का अमला लगातार सक्रिय है। इस योजना के तहत सड़क हादसों में घायल व्यक्तियों को तुरंत इलाज के लिए 7 दिनों तक 1.5 लाख तक का कैशलेस कवरेज देती है, इसका उद्देश्य ‘गोल्डन ऑवर’ में जान बचाना है। परिवहन विभाग द्वारा मिली जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 4800 करोड़ का लक्ष्य शासन से प्राप्त हुआ था, जिसे पूरा करते हुए 4911 करोड़ का राजस्व संगृहित किया है, अर्थात लक्ष्य से 111 करोड़ अधिक राजस्व की प्राप्ति हुई है। इसलिए यह बात लिखने में आज कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि प्रदेश का परिवहन विभाग है विशेष, जिसकी कार्यप्रणाली बदलते उमेश… ।

58 तरह की सुविधा ऑनलाइन:
परिवहन विभाग ने परिवहन पोर्टल और सारथी (ड्राइविंग लाइसेंस) पोर्टल के माध्यम से नागरिक सुविधाओं के लिए 58 तरह की सुविधाएं ऑनलाइन कर दी है। जिससे अब लोगों को बार-बार परिवहन विभाग के चक्कर लगाने से छुटकारा मिल रहा है। यह 58 तरह की सुविधाओं में ड्राइविंग लाइसेंस सेवाएं, वाहन पंजीकरण सेवाएं, ऑनलाइन भुगतान ,वाहन विवरण, मोबाइल नंबर अपडेट ,फैंसी नंबर, डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना, डुप्लीकेट वाहन पंजीयन कार्ड, मृत्यु के बाद स्वामित्व का हस्तांतरण जैसी अन्य सुविधाएं शामिल है, जिसका लाभ आम जनता को अब सीधे मिल रहा है।

उच्च न्यायालय के निर्णय का परीक्षण कर रहा विधि विभाग:
मप्र उच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश के परिवहन चेक पोस्टों को 30 दिनों के भीतर चालू करने का जो फैसला सुनाया है उस पर विधि विभाग की टीम परीक्षण कर रही है। उच्च न्यायालय ने 30 जून 2024 से बंद हुए परिवहन चेक पोस्ट को 30 दिनों के अंदर चालू करने का निर्देश दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि आदेश का पालन नहीं होगा तो अवमानना की कार्यवाही की जाएगी। मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री ने भी बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि न्यायालय के आदेशों का अक्षरश: पालन किया जायेगा। सूत्रों का कहना है कि परिवहन विभाग हाईकोर्ट के इस सम्पूर्ण निर्णय का परीक्षण विधि विभाग से करा रहा है। जिसके उपरांत ही सभी 45 आरटीओ चेक पोस्ट को सावधानियों के साथ चालू किया जाएगा, ताकि कोर्ट के निर्देश का पालन भी हो और मुख्यमंत्री की मंशा भी कार्यान्वित हो जाए।