मोहन सरकार ने किसानों के कल्याण का सबसे बड़ा काम किया

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समाचार विश्लेषण (मध्य स्वर्णिम): राकेश व्यास (मो. 9977701999)
मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने किसानों के हित में अब तक का सबसे बड़ा, क्रांतिकारी और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए कृषि भूमि के भूअर्जन पर गुणन कारक (मल्टीफिकेशन फैक्टर) को दोगुना करते हुए 2.0 कर दिया गया है। इससे अब अधिग्रहित कृषि भूमि का मुआवजा किसानों को दोगुना के स्थान पर बाजार दर से 4 गुना प्राप्त होगा । यह निर्णय संपूर्ण प्रदेश की ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि के अधिग्रहण पर लागू होगा। जाहिर है अपने आप में यह निर्णय न केवल ऐतिहासिक है अपितु कृषि कल्याण वर्ष में किसानों के प्रति मोहन सरकार की संवेदनशीलता को भी दिखाता है । इस फैसले को लागू कराने की खुशी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चेहरे पर भी साफ दिखाई दी, जब उन्होंने अपने मुख्यमंत्री आवास में उपस्थित पत्रकारों को यह जानकारी स्वयं देते हुए एक संतुष्टि के भाव में दिखाई दिए । सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए किसान और किसान संगठन लगातार मांग करते रहे हैं । इसके आधार पर सरकार ने भूमि अर्जन के नियम में बदलाव किया है। किसी भी सरकारी निर्माण कार्य या सार्वजनिक कार्य के लिए ग्रामीण क्षेत्र में जमीन अधिग्रहित की जाती है तो किसान अथवा ग्रामीण को इसके एवज में जो मुआवजा अब तक मिलता रहा है वह चार गुना होगा । राज्य सरकार सिंचाई क्षेत्र को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है । उसी क्रम में बड़ी राशि स्वीकृत की गई है। सिंचाई क्षेत्र को बढ़ाने का लक्ष्य किया गया है। दो लाख हेक्टेयर तक सिंचित करने की योजना है, और इस दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। मंत्रि-परिषद ने नगरीय सीमा में मुआवजा गुणन कारक को यथावत एक रखा गया है। मंत्रि-परिषद ने इसके साथ सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे अधोसंरचना निर्माण तथा विकास के कार्यों के लिए लगभग 33 हजार 985 करोड़ रूपये की स्वीकृति भी दी है। किसानों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ‘मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम 2015’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गुणन कारक को बढ़ाकर 2.0 कर दिया गया है, जिससे किसानों को अब उनकी कृषि भूमि का बाजार दर से 4 गुना मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस निर्णय से सिंचाई परियोजनाओं, सड़क, पुल, रेलवे और बांध निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को अधिक राशि मिल सकेगी। इससे न केवल विकास कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि भूमि देने वाले किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार होगा । उल्लेखनीय है कि इस संबंध में मंत्री तुलसीराम सिलावट, राकेश सिंह और चेतन्य कुमार काश्यप की उप-समिति ने अनुशंसा की थीं। उप-समिति ने अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के साथ ही विभिन्न् किसान संगठन क्रेडाई, सीआईआई और फिक्की से चर्चा के बाद यह रिपोर्ट तैयार की थी। सरकार के इस पारदर्शी और किसान हितैषी निर्णय से प्रदेश के हजारों परिवारों को सीधा लाभ पहुँचेगा ।