खनन माफिया को लेकर नाराज सुप्रीम कोर्ट, चंबल में अवैध रेत खनन, पुल की नींव खोदने पर सरकार को फटकार

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नई दिल्ली/भोपाल सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन को लेकर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे चौंकाने वाली स्थिति और राज्य सरकार की नाकामी बताया। अदालत ने यह टिप्पणी उस घटना पर की जिसमें एक वन रक्षक की मौत हो गई और चंबल नदी पर बने पुल के खंभों की नींव तक अवैध खनन माफिया द्वारा खोदी जा रही है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि या तो राज्य सरकार अवैध खनन रोकने में पूरी तरह विफल रही है या फिर यह सब उसकी मिलीभगत से हो रहा है। अदालत ने कहा कि पुल की नींव खोदी जा रही है। अगर पुल गिर गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? तस्वीरें खुद ही सब कुछ बयां कर रही हैं। वन अधिकारियों को रेत माफिया कुचल रहे हैं, यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। पीठ ने आगे कहा कि यह सब सरकार की नाक के नीचे हो रहा है और पूछा कि जब आपके पास रोकने के साधन ही नहीं हैं तो राज्य सरकार का अस्तित्व क्यों है? यह मामला ‘नेशनल चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और जलीय जीवों पर खतरे’ से जुड़ा स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) केस है। अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने बताया कि यह पुल 32 खंभों पर बना है और मध्य प्रदेश-राजस्थान को जोड़ता है, लेकिन खनन माफिया इसकी नींव तक खोद रहे हैं। अदालत ने सुझाव दिया कि अवैध खनन रोकने के लिए हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और भारी मशीनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जाए ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।