धर्म का संविधान हमें मर्यादा सिखाता है: हिमांशु कृष्ण भारद्वाज महाराज

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रायपुर (मध्य स्वर्णिम): रायपुर के व्हीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पूज्य हिमांशु कृष्ण भारद्वाज महाराज ने कथा सुनाते हुए कहा कि संविधान हमें नियम में बांधने का काम करता है लेकिन धर्म संविधान हमें मर्यादा में रहना सिखाता है। संविधान में ऐसी कोई धारा नहीं है जो अपराध को रोक सके, नियंत्रित कर सके लेकिन धर्म का संविधान एक ऐसा संविधान है जो व्यक्ति धारा ही बदल देता है। मर्यादा में बांधे रखता है और जो धर्म संविधान को मानेगा वो। कभी अपराध नहीं करेगा। श्री महाराज ने भक्त प्रह्लाद की भक्ति और हिरण्यकश्यप के अत्याचार की कहानी सुनाते हुए कहा कि जब भक्त प्रह्लाद भगवान की भक्ति कर रहे थे तब हिरण्यकश्यप ने उन्हें रोकने का बहुत प्रयास किया काल कोठरी में बंद कर दिया, पहाड़ से नीचे फेंक दिया। होलिका की गोद में बैठाकर जलाने का प्रयास किया लेकिन भक्त प्रह्लाद की भक्ति और विश्वास के कारण हिरण्यकश्यप कुछ भी नहीं बिगाड़ पाए। हमारे अन्दर भी भक्त प्रह्लाद जैसी भक्ति होनी चाहिए तभी भगवान आपकी रक्षा करेंगे और आपके दुखों को दूर करेंगे। जैसे भगवान ने नरसिंह अवतार में हिरण्यकश्यप के अत्याचार से मुक्ति दिलाई और उसका वध किया। कथा की शुरुआत ने भारद्वाज जी महाराज ने एक राजा और संत की कहानी सुनाते हुए बताया कि एक नगर में राजा की यह ख्याल आया कि भगवान के दर्शन करना है।

अपना दुख दो लोगों के अलावा किसी को नहीं बताना चाहिए:
कथा व्यास हिमांशु कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि व्यक्ति को अपना दुख कभी किसी को नहीं बताना चाहिए क्यों कि आपका दु:ख कोई दूर नहीं कर सकता सिवाय 2 लोगों के पहला है गुरु आपका जो भी दुख पहले अपने गुरु को बताएं यदि गुरु भी किसी कारणवश अपना दुख दूर नहीं कर पाए तो फिर गोविंद को बताना गोविंद ही हैं जो आपके दुख को निश्चित सुख में परिवर्तित कर सकते हैं। इसलिए इस बात का ख्याल रखें कि हर किसी के सामने अपना दुख जाहिर नहीं करना है।