मोहन-शिव-श्री राम: संस्कृति संवर्धन का काम

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बयार बदलाव की (मध्य स्वर्णिम): सुनील दत्त तिवारी (मो. 9713289999)
संस्कृति, संस्कारों, प्रतिमानों, धरोहरों से परिपूर्ण, पारंपरिकता की विशाल श्रृंखलार वन्य जीवों की विविधता, नैसर्गिक सौंदर्य से इठलाता नदियों का मायका मध्यप्रदेश आज अपने यौवन के चरमोत्कर्ष पर है। देश ही नहीं पूरे विश्व में मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक साहित्यिक, वास्तुकला और स्थापत्य के पुनर्जीवन को अनुभव किया जा रहा है। मध्य प्रदेश ने पिछले करीब सवा दो वर्षों में अपने सांस्कृतिक, विरासत और देशज विज्ञान के उन सुनहरे दौर का वैश्विक प्रति स्थापन किया है जिसके बूते इतनी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं, जितनी पहले शायद पूरे कालखंड में नहीं मिली होंगी। प्रदेश के सांस्कृतिक अभ्युदय की गूंज आज उत्तर – दक्षिण, पूरब और पश्चिम चतुर्दिक हो रही है। तभी तो सम्राट विक्रमादित्य की न्याय, धर्म, राज व्यवस्था और प्रजा पिता की छवि को पूरा देश गहराई से जान पा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर धर्म की राजधानी काशी में जब सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का महामंचन पहली बार हुआ तो दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हों या गोरक्ष पीठ के महंत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों, मध्य प्रदेश के इस प्रयासों की जय-जयकार करते दिखाई दिए। दरअसल वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बन चुके मध्यप्रदेश को सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए मध्यप्रदेश के विजनरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सोच को पर्दे के पीछे रहकर धरातल पर उतारने का बीड़ा मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार और दीर्घ काल से प्रदेश की वास्तु को समझने वाले श्रीराम तिवारी और प्रदेश के संस्कृति को परिमार्जित करने की सोच के साथ आगे बढ़ रहे प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। श्री राम तिवारी, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार हैं। डॉ. मोहन यादव सरकार में पहली गैर सरकारी नियुक्ति श्री राम तिवारी की ही हुई है, लिहाजा यह समझना मुश्किल नहीं होगा कि इसके मायने क्या हैं? वरिष्ठ आईएएस शिव शेखर शुक्ला एक सुलझे हुए, गंभीर और परिणाम देने वाले अधिकारियों में गिने जाते हैं। लंबे समय से संस्कृति विभाग के मुखिया के रूप में सफलता के कई आयाम स्थापित कर दिए हैं। इन दोनों के अलावा भी एक संगठित, सुव्यवस्थित टीम दिन रात प्रदेश के अभ्युदय के लिए काम कर रही है। उसी का परिणाम है कि मध्यप्रदेश अपनी लोक रंजना को वैश्विक पटल पर स्वीकार्यता दिलाने में सफल हो रहा है। डॉ. मोहन यादव, सर्वाधिक शिक्षित मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं जो उनके विजन से दिखता है। लोकमाता अहिल्याबाई से लेकर अमर बलिदानी रघुनाथ शाह, जल, जंगल, जमीन के अधिकार के लिए समर्पित क्रांतिकारी टंट्या भील हों या फिर गुमनाम : स्वातंत्र्त्य नायक सभी को सामने लाकर नई पीढ़ी से परिचित कराने का काम संस्कृति विभाग बखूबी कर रहा है। अपेक्षा की जानी चाहिए कि इस काल खंड में सिंहस्थ जैसा अद्वितीय भारत का सांस्कृतिक धार्मिक समागम न भूतो न भविष्यति जैसा ही होगा।

उम्मीदों के उत्कर्ष का सिंहस्थ:
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए सर्वाधिक महत्वाकांक्षी अवसर सिंहस्थ – 2028 है। अपनी महत्वाकांक्षा को डॉ. यादव ने छिपाया नहीं है,और उसी रफ्तार के साथ सिंहस्थ के सफल आयोजन की शुरुआत 13 दिसंबर 2024 से ही कर भी दी है। दरअसल, पहली बार बाबा महाकाल के आशीष से उज्जैन का ही मुख्यमंत्री चुना गया है। उज्जैन का प्रतिनिधित्व करते हुए मोहन सिंहस्थ को मोहक बनता देखना चाहते हैं। सिंहस्थ के सफल और अविस्मरणीय आयोजन में मोहन के साथ श्री राम तिवारी और शिव शेखर की भूमिका भी रेखांकित करने वाली होगी।


कलजयी विक्रमादित्य : अखिल भारतीय मंचन:

संस्कृति विभाग ने युग युगों तक कुछ ग्रंथों में संदर्भों तक सीमित महराजा विक्रमादित्य के वैराट्य स्वरूप और शासन, न्याय, दानशीलता, संस्कृति संरक्षण के विलक्षण गुणों को महानाट्य के रूप में प्रस्तुत कर नया प्रतिमान गढ़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में विमोचित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अब विश्व को कालगणना बताने के लिए तैयार है। उधर विक्रमादित्य महानाट्य दिल्ली से वाराणसी और देश के अन्य सांस्कृतिक केंदों में सुशासन की धर्म ध्वज को फहराने आतुर है।