‘दीपक’ की कार्यवाही न्यायोचित नहीं…

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बात खरी-खरी (मध्यस्वर्णिम): ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार (मो. 9425002527)
मध्यप्रदेश के आबकारी आयुक्त आईएएस दीपक सक्सेना ने जो कार्यवाही की है, उससे उनके ही विभाग में विरोध के स्वर शुरू हो गए है। दबी जुबान में मैदानी अमला यह कह रहा है कि जिलों में आबकारी दुकानों की नीलामी में ठेकेदार रुचि नहीं दिखा रहे हैं तो इसमें जिला आबकारी अधिकारियों क्या दोष है। जबकि शराब दुकानों के नीलामी की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ ऑनलाइन है, बावजूद इसके ठेकेदार को सरकार द्वारा तय किए गए आरक्षित मूल्य अधिक लगने के कारण वे टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे है। इसका मतलब यह तो नहीं है कि संबंधित जिला आबकारी अधिकारी इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। जिस तरह से आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने आनन-फानन में दो आदेश जारी करके गुरु प्रसाद केवट जिला आबकारी अधिकारी अशोकनगर और गुना तथा अंशुमान सिंह चिडार जिला आबकारी अधिकारी बैतूल को मदिरा दुकानों की नीलामी में अपेक्षित तेजी और प्रभावी कार्यवाही नहीं करने से शासन द्वारा तय राजस्व लक्ष्य की पूर्ति नहीं होने के लिए दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया, यह कितना उचित है। जिसके बाद यह कहावत दीपक सक्सेना पर सटीक बैठ रही है कि… गुनाहगार को पनाह, और बेगुनाह को सजा मिलती है, इस शहर में अब तो, सिर्फ साजिशों की हवा मिलती है। मैं रोता रहा, चीखता रहा, न्याय की उम्मीद में, यहाँ तो खामोश रहने वालों को ही दाद मिलती है। दरअसल सरकार ने पिछले वर्ष का वार्षिक मूल्य 16627 करोड़ रुपए रखा था। जिसे इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में बढ़ाकर : आरक्षित मूल्य 19952 करोड़ रुपए कर दिया है। जिसे पूरा करने के लिए सभी जिला आबकारी अधिकारियों पर दबाव है। लेकिन अभी भी करीब 380 से अधिक शराब दुकानों की नीलामी नहीं हो पाई है। हालत यह है कि कई जिलों में तो आबकारी विभाग के कर्मचारी शराब दुकानों का संचालन कर रहे है। ऐसे में आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना क्या उन सभी जिलों के डीईओ को भी निलंबित कर देंगे…? जब ‘मध्य स्वर्णिम’ की टीम ने बैतूल, गुना और अशोकनगर जिले में ग्राउंड जीरो पर जाकर वस्तुस्थिति का पता लगाया तो चौंकाने वाली बात सामने आई कि बैतूल में तो 8 शराब दुकानों की नीलामी नहीं हो पाई, जिसके पीछे प्रमुख कारण ऑफसेट प्राइज माइनस 30 प्रतिशत से अधिक आने के कारण 3 दुकान अनसोल्ड रही। लेकिन यह स्थिति इसलिए निर्मित हुई क्योंकि ठेकेदारों को शराब दुकानों का ऑफसेट प्राइज अधिक लगा। सूत्रों का कहना है कि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जिला आबकारी अधिकारी बैतूल को आफसेट प्राइज किसी भी तरह माइनस 30 प्रतिशत तक लाने के निर्देश दिए थे। लेकिन अंशुमान सिंह चिडार जिला आबकारी अधिकारी बैतुल इसमें सफल नहीं हो पाए और उन पर निलंबन की गाज गिर गई। इसी तरह अशोकनगर और गुना में भी शराब ठेकेदारों ने मूल्य अधिक्र होने पर नीलामी में भाग नहीं लिया। क्योंकि बैतूल, अशोकनगर और गुना में आबकारी विभाग जिन शराब दुकानों की नीलामी कर रहा है वहां पर लगातार जनसंख्या घटी है। ऐसे में घाटे का अंदेशा होने के कारण दुकानों की नीलामी में ठेकेदारों ने भाग नहीं लिया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना द्वारा की गई कार्यवाही न्यायोचित नहीं है…। अपितु दीपक सक्सेना ने तो देर आये दुरुस्त आये की तर्ज पर दोनों डीईओ का निलंबन समाप्त करने जैसा साहसिक कदम उठाना चाहिए, क्योंकि उन्हें अभी भी आपसे न्याय मिलने का भरोसा है, इसलिए… ‘उम्मीद का दिया बुझ रहा है, इंसाफ के इंतज़ार में, कातिल आजाद घूम रहे हैं, बेखौफ सरेआम में। कसम खाई थी, न्याय मिलेगा इस मुल्क में, अब तो भरोसा भी उठ गया है, इस कदर के हाल में।’