ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक करें उपयोग: मुख्यमंत्री

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन का उपयोग हो। सिपरी साफ्टवेयर न सिर्फ डीपीआर तैयार करने की दृष्टि से उपयोगी है बल्कि सडक के साथ पुल-पुलियों की आवश्यकता दर्शाने में भी इसका उपयोग हो रहा है। सड़क निर्माण कार्यों को पूर्ण करने में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग शुरू करना सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समत्व भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सुगम संपर्कता परियोजना संबंधी बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि गत माह शुरू किए गए राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान की विभागीय स्तर पर प्रति सप्ताह समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक बगिया मां के नाम अंतर्गत की गई गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान में आमजन की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि परियोजना में प्रदेश में एक हजार करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण कराया जाएगा तथा 100 से अधिक आबादी वाले मजरों- टोलों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा।

पूर्व से निर्मित सड़कों की जियो इंवेंट्री:
सुगम संपर्कता परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें पूर्व में बनी सड़कों की रिम्स पोर्टल के माध्यम से जियो- इंवेंट्री की जा रही है। इससे नई सड़कों के चयन में दोहराव की स्थिति नहीं बनेगी। जियो इंवेंट्री में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, पीएमजीएसवाय, मुख्य जिला सड़क और संपर्कता ऐप से चयनित सड़कें शामिल हैं।

जियो- इंवेंट्री का आधा कार्य पूर्ण:
निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 33 हजार 655 सड़कों में से 17 हजार 437 सड़कों की जियो इंवेंट्री का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही 9 जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक सर्वे कार्य पूर्ण कर लिया गया है। रतलाम, जबलपुर, आगर-मालवा, मंदसौर और पन्ना जिले इस कार्य में अग्रणी हैं।

सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग स्थल चयन में:
सुगम संपर्कता परियोजना के तहत 2 गांवों, ग्राम पंचायतों, मजरों-टोलों और विद्यार्थियों के हित में सांदीपनि विद्यालयों तक बनने वाली सड़कों के लिए स्थान का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर से किया जा रहा है। सड़कों की डीपीआर तैयार करने के लिए भी इस सॉफ्टवेयर और रिम्स पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।