सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर ठोंका जुर्माना

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नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के डबल बेंच के एक फैसले को चुनौती देने के लिए केंद्र सरकार पर 25000 का जुर्माना लगा दिया। मामला एक सीआईएसएफ कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी से जुड़ा है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उसकी बर्खास्तगी खत्म करते हुए, उसका 25% वेतन भी वापस करने का फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र के स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) खारिज कर दिया है। लाइव लॉ डॉट इन की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने एसएलपी डालने के केंद्र के कदम की आलोचना की। सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने केंद्र सरकार को सबसे बड़ा मुकदमेंबाज बताया और कहा कि इसी वजह से अदालत में इतने केस लंबित हैं। उन्होंने कहा, यह केस जुर्माने के साथ खारिज होना चाहिए। हम चीखते रहे हैं। अपनी दलीलें अलग रखिए। लंबित मुकदमें, लंबित मुकदमें, सबसे बड़ा मुकदमेंबाज कौन है? सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि 11 दिन की गैरहाजिरी के लिए नौकरी से हटाना बहुत कड़ा कदम है।

क्यों आए सुप्रीम कोर्ट:
अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि ऐसे मामले में सुप्रीम कोर्ट आने की क्या जरूरत थी ? न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यह समझ से बाहर है कि केंद्र सरकार यह मामला सर्वोच्च अदालत तक क्यों लाई। फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों से अदालतों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है।