महिलाओं के खाते में सीधे 24500 करोड़ होंगे जमा, चुनावों में जमकर बंट रहीं मुफ्त की रेबडिय़ां…

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नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): नेताओं ने वोट खरीदने का एक आसान और सरल रास्ता अपना लिया है। ये बात कोई और नहीं बल्कि आम आदमी कहता सुना जा रहा है। इस बार के चुनावों में राज्यों में होड़ लगी हुई है मुफ्त में रेबड़ियां बांटने की। नतीजा आम आदमी की जेब से निकलकर सीधे साढ़े 24 सौ करोड़ रुपए महिलाओं को बांट दिए जाएंगे। ताकि उन्हे वोट मिले और सत्ता पर काबिज हो जाएं। 5 राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों ने सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए कैश ट्रांसफर यानी सीधे नकद सहायता को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। एक विश्लेषण के अनुसार, चुनावी राज्यों में चार प्रमुख सरकारें महिलाओं के बैंक खातों में सीधे 24500 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर रही हैं।

राजनीति के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे चुनाव में:
इन दलो का चुनावी वादा भी यही है कि यदि वे दोबारा सत्ता में आते हैं, तो अगले पांच वर्षों तक यह वित्तीय सहायता निर्बाध रूप से जारी रहेगी। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इन चार राज्यों में कुल 17.89 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 4.1 करोड़ महिलाएं इन नकद योजनाओं की सीधी लाभार्थी हैं। यानी कुल वोटरों का लगभग 23 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर इन योजनाओं से जुड़ा है। विभिन्न राज्यों में इस नकद राजनीति के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ सरकार ने स्पेशल समर पैकेज के नाम पर महिलाओं के खातों में 2-2 हजार रुपये डाल दिए हैं। वहीं, असम में बिहू उत्सव के उपलक्ष्य में महिलाओं को 4-4 हजार रुपये की सहायता दी गई है। केरल की वामपंथी सरकार स्त्री सुखम नकद योजना के जरिए करीब 10 लाख महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये दे रही है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अपनी प्रसिद्ध लक्ष्मी भंडार योजना की राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की है।