आंध्र प्रदेश और झारखंड में बाघों की फैमिली बसाएगा मप्र

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश की बाघिन जल्द ही झारखंड और आंध प्रदेश राज्य में भी टाइगर्स का कुनबा बढ़ाएगी। छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा के बाद झारखंड और आंध्र प्रदेश ने भी मध्य प्रदेश से बाघ मांगे हैं। आंध्र प्रदेश ने एक बाघिन, जबकि झारखंड ने 2 बाघिन और एक बाघ मांगा है। देश में मध्य प्रदेश में बाघों की सबसे ज्यादा संख्या है। उम्मीद लगाई जा रही है कि बाघों की गणना की अगले साल आने वाली रिपोर्ट में प्रदेश में बाघों की संख्या 1 हजार पार पहुंच सकती है। आंध्र प्रदेश में बाघों की संख्या में पिछले सालों के मुकाबले सुधार आया है। साल 2006 में आंध्र प्रदेश में बाघों की संख्या 95 थी, जो साल 2010 में घटकर 72, 2014 में 68 और 2018 में घटकर 48 रह गई थी। इसके बाद प्रदेश में बाघों के संरक्षण को लेकर काम शुरू हुआ। इसका नतीजा 2022 में दिखाई दिया। यहां बाघों की संख्या बढकर 63 पहुंच गई। वहीं चरण चार की निगरानी रिपोर्ट के मुताबिक 2023-24 में बाघों की संख्या बढकर 87 हो गई है। आंध्र प्रदेश ने बाघों के कुनबे में बढ़ोत्तरी के लिए मध्य प्रदेश वन विभाग से भी मदद मांगी है।

छत्तीसगढ़ ने पहले मांगा बाघ, फिर नहीं ली सुध:
आंध्र प्रदेश और झारखंड से पहले छत्तीसगढ़, ओडिशा और राजस्थान भी मध्य प्रदेश से बाघ मांग चुके हैं। राजस्थान में पिछले साल दिसंबर माह में बाघ को भेजा जा चुका है, जबकि ओडिशा में दो मादा बाघ और एक नर बाघ भेजा जाना है। इसी तरह छत्तीसगढ़ को भी तीन बाघ भेजे जाने हैं। इनमें एक बाघिन और 2 नर बाघ हैं। इसके लिए एनटीसीए की पहले ही अनुमति मिल चुकी है। छत्तीसगढ़ भेजे जाने वाले बाघों का चुनाव भी कर लिया गया है। हालांकि छत्तीसगढ़ द्वारा इसके लिए संपर्क ही नहीं साधा जा रहा है।

बाघ भेजने की प्रकिया आसान नहीं:
एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर एक टाइगर रिजर्व से दूसरे टाइगर रिजर्व में भी टाइगर को भेजे जाने के लिए एक पूरी प्रक्रिया का पालन करना होता है। वन विभाग को इसके लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए की अनुमति लेनी होती है। रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी सुदेश बाघमारे कहते हैं कि कोई भी राज्य दूसरे राज्य से सीधे टाइगर न मांग सकता है और न ही दे सकता है। इसके लिए सबसे पहले संबंधित राज्य को एनटीसीए को प्रस्ताव भेजना होता है। इसमें बताना होता है कि वह बाघ को क्यों ला रहे हैं और उसे कहां रखा जाएगा? इसके लिए किस तरह की जमीनी तैयारी की गई है।