नई दिल्ली/भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश के सबसे बड़े व्यापम भर्ती घोटाले की जांच फिर तेज हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर व्यापम से संबंधित मामले में कड़ा रुख अपनाया है। व्यापम घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए सीबीआई और मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पर्व विधायक पारस सकलेचा की 320 पेज की शिकायत पर अब तक क्या जांच हुई और चार्जशीट में क्या स्थिति है, इसकी स्पष्ट जानकारी देने को कहा है। यह मामला पारस सकलेचा की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अपनी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर इंदौर हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि वे सीधे प्रभावित पक्ष नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ (जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया) ने सीबीआई और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था, लेकिन समय पर जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए दोनों से हलफनामा पेश करने को कहा है। पारस सकलेचा ने 2014 में पीएमटी और अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर दस्तावेजों सहित शिकायत की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने सीबीआई को 320 पेज की विस्तृत शिकायत SP सौंपी। इस मामले में सीबीआई और एसटीएफ ने उनके बयान दर्ज किए, लेकिन आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के आरोप हैं। जांच एजेंसियों की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर सकलेचा ने 2023 में इंदौर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अप्रैल 2024 में याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की गई है। सकलेचा की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक विवेक तंखा, सर्वम रितम खरे, विपुल तिवारी तथा इंद्रदेव सिंह एवं शासन की ओर से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल श्रीधर पोटराजू, सीबीआई की और से दविंदर पाल सिंह ने न्यायालय में पक्ष रखा ।
ये है मामले की टाइम लाइन:
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जून 2015 में व्यापम? घोटाले की जांच सीबीआई द्वारा कराए जाने के आदेश पर सकलेचा ने 14 जुलाई 2015 को नई दिल्ली में सीबीआई को दस्तावेज सहित 320 पेज? की शिकायत की ।सीबीआई ने फरवरी 2016 में तथा एसटीएफ ने फरवरी 2015 तथा जून 2015 में सकलेचा के बयान दर्ज किए । सीबीआई ने 27 मई 2015 को सकलेचा की शिकायत को कार्रवाई करने के लिए मुख्य सचिव को भेज दिया ?। तथा एसटीएफ ने 22 जुन 2015 को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को पत्र लिखकर 14 बिंदु पर जवाब मांगा ।एसटीएफ ने 11 सितंबर से 13 सितंबर 2019 तक सकलेचा के बयान पुन: दर्ज किये । सीबीआई , एसटीएफ तथा मुख्य सचिव द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने पर सकलेचा द्वारा 2023 मे इंदौर हाई कोर्ट में दायर पिटीशन को न्यायालय ने अप्रैल 2024 में इस आधार पर खारिज किया कि सकलेचा प्रभावित पक्ष नहीं है ।




