शिव का प्रकाश, मोहन का मन और हेमंत का हुनर

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खबर विश्लेषण (मध्य स्वर्णिम): ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार (मो. 9425002527)
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2024 को प्रदेश की बागडोर संभाली थी। लगभग डेढ़ दशक के शिवराज सिंह चौहान की जगह, इस बार संगठन ने उज्जैन के मोहन यादव को वरीयता देकर कुछ तूफानी करने का संकेत दिया। इससे जमीनी कार्यकर्ताओं में एक भरोसा कायम हुआ कि पार्टी हाशिए पर खड़े कार्यकर्ता को भी मुख्यधारा में लाने के लिए उत्सुक है। आम भाजपा कार्यकर्ता का यह भरोसा तब और मजबूत हुआ, जब पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एकदम लो-प्रोफाइल, लेकिन संगठन के कुशल शिल्पी हेमंत खंडेलवाल को सभी कयासों को दरकिनार करते हुए प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा। इन दो बड़े परिवर्तनों ने एक साफ़ सन्देश दिया कि पार्टी कद से ज्यादा कर्म को तरजीह दे रही है। इसी आशा के साथ अब सभी की नजर प्रदेश के निगम और मंडलों की संभावित शीघ्र होने वाली घोषणा पर टिक गई है। उससे पहले एक और बड़ी राजनैतिक नियुक्ति से कार्यकर्ताओं की बांछें खिली हुई नजर आ रही है। रामजन्मभूमि आंदोलन के बड़े चेहरे ग्वालियर अंचल में पार्टी का झंडा मजबूती से थामे हुए जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने सभी को अचंभित कर दिया। दरअसल, पवैया पिछले सात वर्षों से सक्रिय राजनीति के अस्ताचल में ही थे। भले ही उन्हें महाराष्ट्र का सहप्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई हो। लेकिन, सभी को पता है जयभान दादा के कद और समर्पण के मुताबिक वह पद नहीं था। जयभान सिंह पवैया के राजनैतिक पुनर्वास ने सभी की आशाओं के दीपक जला दिए हैं। मध्यप्रदेश में 2003 के बाद अभी तक (2018 से डेढ़ साल को छोड़कर) बीजेपी ही सत्ता में हैं। इस दौरान कई परिवर्तनों के दौर से पार्टी प्रदेश में गुजरी। एक समय ऐसा भी आया कि कांग्रेस का एक प्रभावी धड़ा टूटकर पार्टी में समाहित हो गया। तब यह कहा गया कि दूध और शक्कर को घुलने में समय लगेगा। लेकिन, अब परिस्थितियां बता रही हैं कि दूध में शक्कर पूरी तरह से घुल चुकी है। अब कार्यकर्ता स्वाति नक्षत्र की बूँद की भांति निगम मंडलों के लिस्ट की राह देख रहे हैं। आशाएं बड़ी हैं, अपेक्षाएं भारी हैं, संगठन कार्यकर्ताओं का आभारी है लिहाजा उचितों को सम्मानित करने की बारी है। कार्यकर्ताओं की भावनाओं के सम्मान के लिए, अब संगठन और सत्ता ने समन्वय की पहल की है। दरअसल मध्य प्रदेश प्रदेश में। निगम- मंडलों और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक नियुक्तियों की कवायद अंतिम दौर में है और एक साथ सूची जारी किए जाने की रणनीति पर मंथन तेज हो गया है। इसके लिए शिव प्रकाश, डॉ. मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल की कई दौर की बात हो चुकी है और संभावित नामों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी अवगत कराया गया है। कार्यकर्ताओं और दावेदारों की निगाहें अब भोपाल से लेकर दिल्ली तक टिकी हैं।

माना जा रहा है कि जिन नामों पर आपत्तियां हैं, उन पर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से होगा। राजनीतिक समीकरणों को साधना इस बार सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। क्षेत्रीय, जातीय और संगठनात्मक संतुलन के साथ पुराने और नए चेहरों को मौका देने की रणनीति पर मंथन चल रहा है। पार्टी सूत्रों की माने तो ‘संदेश साफ है कि योग्यता और संगठन के प्रति सक्रियता को प्राथमिकता दी जाएगा ‘निगम-मंडलों में नियुक्तियां केवल पद वितरण नहीं, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार इस बार चरणबद्ध नहीं बल्कि एक साथ बड़ी सूची जारी हो सकती है। ऐसा करने के पीछे उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि, असंतोष की गुंजाइश कम रहे और संगठनात्मक एकता का संदेश जाए। सूत्रों के अनुसार, करीब 30 से 35 निगम-मंडलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। अंतिम मुहर के बाद कभी भी औपचारिक घोषणा की जाएगी। निगम मंडलों में नियुक्ति की पहली सूची में उन पूर्व मंत्रियों का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है, जो विधानसभा चुनाव हार गए थे या जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी थी। हालांकि इसमें पूर्व सरकार में मंत्री रहे नेताओं को जगह मिलने की संभावना कम हैं। पार्टी नए चेहरों को सामने लाने पर फोकस कर रही है। साथ ही परिवारवाद और पट्ठावाद को पूरी तरह से खत्म करना चाह रही है। मतलब साफ़ है, पार्टी अब दूसरे और तीसरे लाइन के नेताओं को जिम्मेदारी देने को तैयार है, जो आगामी समय में युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम को मजबूत कर सकें। इसीलिए इस निगम मंडल के गठन और नामों में ‘शिव का प्रकाश, मोहन का मन और हेमंत का हुनर’ नजर आए तो चौंकिएगा मत…!