नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): वैश्विक स्तर पर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें खुलासा हुआ है। दुनिया का हर छठा व्यक्ति किसी न किसी रूप में बांझपन (इंफर्टिलिटी) की समस्या से जूझ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी इस रिपोर्ट ने भारत के सभी परिवारों और समाज के लिए एक नई चिंता खड़ी कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है। बदलती जीवनशैली, तनाव, अस्वस्थ खानपान और पर्यावरणीय कारणों को इसका मुख्य कारण बताया गया है। खास बात यह है, पहले यह समस्या अधिकतर उम्रदराज लोगों में देखी जाती थी, वहीं अब युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है, देर से शादी करना, करियर पर अधिक ध्यान देने और फास्ट फूड का बढ़ता चलन इस समस्या को बढ़ा रहा है। इसके अलावा, प्रदूषण और हार्मोनल असंतुलन भी प्रजनन क्षमता को घटाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है।
जागरूकता बेहद जरूरी:
कई मामलों में लोगों को समय पर सही जानकारी और इलाज नहीं मिल पाता है। जिसके कारण समस्या और भी गंभीर हो जाती है। डॉक्टरों का कहना है, इस स्थिति से निपटने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और तनाव मुक्त जीवनशैली अपनाने से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह रिपोर्ट न सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बल्कि सामाजिक एवं पारिवारिक दृष्टिकोण में बदलाव के लिए एक चेतावनी भी है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया।
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