ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के निर्माण की जरूरत जिसमें हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हों

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नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव में कहा कि आज जब पूरी दुनिया रूस और यूक्रेन के साथ-साथ ईरान- इजराइल संघर्ष को देख रही है, तो हम साफ देख सकते हैं कि फ्यूचर वॉरफेयर में ड्रोन्स और काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि आज भारत में एक ऐसे ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के निर्माण की जरूरत है, जिसमें हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हों। यह आत्मनिर्भरता सिर्फ प्रोडक्ट के स्तर पर ही नहीं बल्कि कंपोनेंट के स्तर पर भी जरूरी हैं यानी ड्रोन के मॉड्यूल से लेकर सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी सभी भारत में ही बने। उन्होंने कहा कि यह काम आसान नहीं है क्योंकि ज्यादातर देशों में जहां ड्रोन्स बनते हैं, वहां कई अहम कंपोनेंट चीन से आयात किए जाते हैं। नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव का उद्देश्य स्वदेशी रक्षा उपकरण के निर्माण को प्रोत्साहित करना है। यह भारत में रक्षा उपकरण बनाने का मजबूत तंत्र स्थापित करने की बड़ी कोशिश है। खास तौर पर प्राइवेट कंपनियों, छोटे और मध्यम उद्योगों, यानी एमएसएमई को इस सेक्टर से जोडऩे पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वे भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में हिस्सा ले सकें। रक्षामंत्री राजनाथ ने एमएसएमई व अन्य लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि इस काम में देश को आप सभी की जरूरत है।